मुरादाबाद : पॉश कॉलोनियों पर मेहरबानी, पुराने मोहल्ले बदहाल

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मुरादाबाद, अमृत विचार। लोकतंत्र में नागरिकों की नियति समस्याओं के बीच जिंदगी गुजारने की है। न जनप्रतिनिधि उनका दर्द समझते हैं, न अधिकारी दर्द पर मरहम लगाने पहुंचते हैं। बुनियादी सुविधाओं के लिए भी जनता आजादी के कई दशक बाद भी जूझ रही है, क्योंकि न जनप्रतिनिधि और न तंत्र के रहनुमा उनका हमदर्द बन …

मुरादाबाद, अमृत विचार। लोकतंत्र में नागरिकों की नियति समस्याओं के बीच जिंदगी गुजारने की है। न जनप्रतिनिधि उनका दर्द समझते हैं, न अधिकारी दर्द पर मरहम लगाने पहुंचते हैं। बुनियादी सुविधाओं के लिए भी जनता आजादी के कई दशक बाद भी जूझ रही है, क्योंकि न जनप्रतिनिधि और न तंत्र के रहनुमा उनका हमदर्द बन रहे हैं। नागरिक इसे व्यवस्था की लाचारी और खुद की नियति मान खामोशी से दिन गुजार रहे हैं।

ऐसी ही स्थिति नगर निगम के वार्ड नंबर नौ मानसरोवर की है। दिल्ली रोड स्थित 20000 से अधिक आबादी वाले मानसरोवर वार्ड में दो स्थितियां दिखीं। पॉश कॉलोनी में सड़कें चौड़ी और साफ थीं, लेकिन नालियों में कूड़ा जमा था। कई जगह नाली का पानी सड़क किनारे बहता दिखा, लेकिन पुराने मोहल्ले में स्थिति इसके विपरीत। यहां गलियों में सड़क की हालत भी बहुत अच्छी नहीं मिली और न सफाई व्यवस्था दुरुस्त। बीच सड़क पर जहां नगर निगम के सफाईकर्मियों के झाड़ू और ठेला दिखा, वहीं नाली में कूड़ा भरा था। दुकानदार व्यवस्था को कोस रहे थे। उनका दर्द यह भी था कि पार्षद उनके बीच में नहीं आतीं, विधायक के दर्शन की तो बाद दिवास्वप्न जैसी है।

चहुंमुखी विकास का दावा, मगर कोविड संक्रमण की टीस भी
पहली बार मानसरोवर वार्ड की पार्षद बनीं हीरा भारती का राजनीतिक जुड़ाव भाजपा से है। वह कहती हैं कि उनके कार्यकाल में काम सही हुए हैं। सफाई व्यवस्था भी ठीक है, लेकिन कोविड संक्रमण की टीस उन्हें भी है। वह ईमानदारी से स्वीकार करती हैं कि कोविड संक्रमण के चलते काम पर फर्क पड़ा। अब इसमें तेजी आई है। बताया कि वर्तमान में 19 सफाईकर्मी हैं, जो दो शिफ्टों में आते हैं, लेकिन डोर-टू-डोर कूड़ा उठान की व्यवस्था से वह भी नाखुश हैं। पहले हिंदुस्तान कंपनी के कार्य से दुखी रहीं, अब नयी कंपनी के कर्मियों व उनके ऑफिस का दर्शन खुद पार्षद ने नहीं किया है।

वार्ड में सफाई व्यवस्था बिल्कुल भी ठीक नहीं है। नयी कॉलोनियों में तो कर्मचारी जाते हैं, लेकिन पुराने मोहल्लों में झांकने नहीं आते। पार्षद का भी जनता से कोई जुड़ाव नहीं है। सफाईकर्मी नियमित नहीं आते, जिससे सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है। -सचिन पारछा, वार्ड निवासी

वार्ड में सफाई व्यवस्था लचर है। पुराने मोहल्ले उपेक्षित हैं। मलिन बस्ती का और बुरा हाल है। नाले की सफाई अपने पैसे से कराते हैं, क्योंकि गंदगी से रहना दुश्वार हो जाता है। पार्षद का जनता से कोई लगाव नहीं है। -बाबू राम, वार्ड निवासी

पार्षद समस्या जानने नहीं आतीं। चुनाव में केवल वोट से मतलब रहता है। सफाई कराने के लिए पैसे देकर निजी कर्मियों का सहारा लेना पड़ता है। कूड़ा उठान के लिए भी कोई नियमित नहीं आता। -बसंत कुमार, वार्ड निवासी

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