विश्व श्रवण दिवस: आवाज देने पर बच्चा जवाब न दे या फिर क्लास में ना आ रहें हो अच्छे नंबर, तो हो जाएं सावधान

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लखनऊ। बच्चा बुलाने पर जवाब न देता हो या फिर उसके क्लास में अच्छे नंबर ना आ रहे हो, टेलीविजन तेज आवाज में सुनता हो, ऐसे में अभिभावकों को सावधान हो जाना चाहिए और नाक, कान, गले के डॉक्टर को दिखाना चाहिए, बच्चों में यह लक्षण उनके सुनने की क्षमता को दर्शाते हैं। यह कहना …

लखनऊ। बच्चा बुलाने पर जवाब न देता हो या फिर उसके क्लास में अच्छे नंबर ना आ रहे हो, टेलीविजन तेज आवाज में सुनता हो, ऐसे में अभिभावकों को सावधान हो जाना चाहिए और नाक, कान, गले के डॉक्टर को दिखाना चाहिए, बच्चों में यह लक्षण उनके सुनने की क्षमता को दर्शाते हैं। यह कहना है केजीएमयू के ओटोरहिनोलारिजोलांजी विभाग के प्रोफेसर तथा हेड नेक सर्जरी के प्रमुख प्रोफेसर वीरेंद्र वर्मा का। उन्होंने यह बातें वर्ल्ड हियरिंग डे यानी विश्व श्रवण दिवस के अवसर पर अमृत विचार से बात करते हुए कही हैं।

दरअसल, हर वर्ष 3 मार्च के दिन विश्व स्वास्थ्य संगठन एक कैंपेन आयोजित करता है, जिसका उद्देश्य लोगों को बहरेपन की बढ़ रही समस्याओं के प्रति जागरूक करना है । प्रोफेसर वीरेंद्र वर्मा बताते हैं कि यह दिन मनाने का उद्देश्य लोगों को बहरेपन की समस्या से बचाना है, इसके साथ ही लोगों को यह जानकारी भी प्रदान की जाती है कि वह अपने स्वास्थ्य, विशेषकर कानों के स्वास्थ्य का ध्यान कैसे रखें, लोग सचेत रहेंगे तो, बीमारी से दूर रहेंगे।

सुनने की क्षमता, बोलने की क्षमता पर डालती है असर

प्रोफेसर वीरेंद्र वर्मा बताते हैं कि कुछ बच्चों में जन्म के समय से ही सुनने की क्षमता कम होती है या फिर नहीं होती, छोटे बच्चों में कई बार देखा जाता है कि वह बोल नहीं पाते। लोग समझते हैं कि बच्चा बोल नहीं पा रहा है और वह कोई और ही इलाज कराते रहते हैं। उन्होंने बताया कि 3 महीने 6 महीने या फिर 1 साल तक यदि बच्चा आवाज देने पर जवाब ना दें या फिर कुछ बोल ना पाए, तो तत्काल डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। क्योंकि 5 साल से कम उम्र होने पर इलाज अथवा इंप्लांट अच्छा रिजल्ट देता है। उन्होंने बताया कि जब इस तरह की समस्या लेकर लोग इलाज के लिए हमारी ओपीडी में आते हैं, तो यहां पर सबसे पहले हियरिंग टेस्ट कराया जाता है।

सरकार भी करती है मदद

प्रोफेसर वीरेंद्र वर्मा के मुताबिक केंद्र सरकार बच्चों को बहरेपन से निजात दिलाने के लिए योजना चला रही है। इस योजना के तहत सरकार करीब 5 लाख 20 हजार रुपये भी इलाज के लिए देती है।

कम उम्र के बच्चों में होता है

प्रोफेसर वीरेंद्र वर्मा के मुताबिक केजीएमयू में कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी बीते 20 सालों से हो रही है। डॉ वीरेंद्र वर्मा ने स्वयं करीब 70 कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की है। उन्होंने बताया कि इस सर्जरी के माध्यम से बच्चों में जन्मजात बहरेपन की समस्या को दूर किया जाता है।

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