रामपुर : रूस-यूक्रेन युद्ध से भाड़ा बढ़ने से भी प्रभावित होगी मिंट इंडस्ट्रीज

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रामपुर, अमृत विचार। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध से रामपुर की मिन्ट इंडस्ट्रीज पर संकट मंडरा रहा है। कहीं न कहीं इंडस्ट्रीज प्रभावित है, इससे उद्योगपति चिंतित हैं। उनका कहना है कि कोरोना की वजह से प्रभावित इंडस्ट्रीज अभी तक उठकर खड़ी नहीं हो पाई थी, युद्ध ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। …

रामपुर, अमृत विचार। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध से रामपुर की मिन्ट इंडस्ट्रीज पर संकट मंडरा रहा है। कहीं न कहीं इंडस्ट्रीज प्रभावित है, इससे उद्योगपति चिंतित हैं। उनका कहना है कि कोरोना की वजह से प्रभावित इंडस्ट्रीज अभी तक उठकर खड़ी नहीं हो पाई थी, युद्ध ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इससे यहां से भेजे जाने वाले माल का भाड़ा बढ़ने से भी दिक्कतें बताई जा रही हैं। बता दें कि समुद्र के रास्ते शिप के जरिए ही कई देशों में मिन्ट से तैयार क्रिस्टल भेजा जाता है।

देश में रामपुर की मिंट इंडस्ट्रीज से विश्व बाजार में बड़ा कारोबारी संबंध हैं। यहां से यूरोपीय देशों फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, यूके के साथ ही चीन, वहीं रसियन देशों और यूक्रेन को भी माल भेजा जाता है। सालाना करीब दो हजार करोड़ का कारोबार है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि कोरोना के कारण दो साल तक इंडस्ट्रीज प्रभावित रही। कुछ दिनों पहले ही इंडस्ट्रीज ने रफ्तार पकड़ी थी, लेकिन अब रूस और यूक्रेन के युद्ध की वजह से निर्यात पर असर पड़ने लगा है। कोरोना की वजह से पहले ही किराया बढ़ा है। कई कई गुना माल ढुलाई बढ़ने से इंडस्ट्री प्रभावित है, अब फिर भाड़ा बढ़ने से दिक्कतें आने लगेंगी। जिले में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोग जुड़े हैं। इनमें मैंथा उत्पादन करने वाले किसान और मैंथा इंडस्ट्रीज से जुड़े नौकरपेशा भी शामिल हैं।

मैंथा निर्यात में देश में नंबर वन है रामपुर
रामपुर में मेंथा का कारोबार बड़े पैमाने पर होता है। हजारों किसान और उद्यमी इस कारोबार से जुड़े हैं। मेंथा निर्यात में तो रामपुर देश में नंबर वन है। पूरे देश से साल में करीब छह हजार करोड़ का मेंथा निर्यात होता है। इसमें 1750 करोड़ अकेले रामपुर से निर्यात होता है। इस कारोबार में खेत से लेकर निर्यात तक की चेन बनी हुई है। किसान पहले खेत में फसल उगाता है, फिर टंकी में तेल निकालता है। इसके बाद उद्यमियों को बेचता है। उद्यमी प्लांट में तेल से मेंथोल बनाते हैं। रामपुर में मेंथोल तैयार करने के 14 प्लांट लगे हैं। इनमें पांच प्लांट ऐसे हैं, जो निर्यात कर रहे हैं। रामपुर के सुशील सहाय ने ही मेंथा की शिवालिक प्रजाति की खोज की, जिसके लिए उन्हे पदमश्री से सम्मानित किया गया था।

इन देशों में होता है मैंथा का निर्यात
यूपी मैंथा एक्सपो‌र्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विष्णु कपूर कहते हैं कि रामपुर से चीन, अमेरिका, स्पेन, जर्मनी, ब्राजील, इटली आदि देशों को 1750 करोड़ का मेंथा उत्पादों का निर्यात होता है। इसका प्रयोग विक्स, खांसी के सीरप एवं दर्द निवारक दवा में होता है। साबुन और सैनिटाइजर में भी इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। मेंथा उद्यमी विपिन गुप्ता कहते हैं कि रामपुर में मेंथा की टेस्टिग लैब न होने से दिल्ली में टेस्टिग करानी पड़ती है। इंटरनेशनल बैंकिग के लिए मुरादाबाद के चक्कर लगाने पड़ते हैं। रामपुर में यह सुविधा होने से उद्यमियों के साथ ही रामपुर का नाम भी चमकेगा।

मैंथा कलस्टर बनना प्रस्तावित है रामपुर
एक जिला एक योजना में मैंथा को भी शामिल करने के बाद मैंथा कलस्टर बनना प्रस्तावित है। यहां मैंथा की टेस्टिंग लैब भी बनेगी। किसानों को मेंथा तेल निकालने के लिए टंकी की स्थापना के लिए 25 करोड़ तक का लोन मिलने लगेगा। इसमें 25 फीसद छूट भी दी जाएगी। इसी तरह उद्यमियों को 1.50 करोड़ लोन पर 20 लाख रुपये तक अनुदान देने की योजना है। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं मेंथा उद्यमी एसके गुप्ता कहते हैं कि केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने जिले को इस योजना में शामिल कराया था। इससे मैंथा उद्यमियों को सरकार की ओर से तमाम सुविधाएं मिल सकेंगी।

करोड़ों का भुगतान और अटकने की आशंका : अमृत
मिंट एसोसिएशन के अध्यक्ष अमृत कपूर का कहना है कि कोरोना की वजह से पहले से ही भाड़ा कई कई गुना बढ़ चुका है। रूस यूक्रेन के बीच युद्ध से फिर भाड़ा बढ़ेगा, इससे सीधा इंडस्ट्रीज पर असर पड़ेगा। सिंगापुर, चायना के भाड़े दस गुना बढ़े हुए हैं। यूरोपीय देशों के भाड़े पांच गुना कोरोना के बाद बढ़ चुका है। ऐसे में युद्ध के बाद हालत खराब होगी। करीब ढाई सौ करोड़ का भुगतान होता है, इससे भुगतान भी फंस गए हैं। युद्ध कितना लंबा खिंचता है, यह इस पर निर्भर करता है, ज्यादा दिन लड़ाई हुई तो इसका नुकसान होगा।

इंडस्ट्रीज के लिए चुनौती का सामना करना होगा : अमित
मिंट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अमित अग्रवाल का कहना है कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध होने के बाद हालात लगातार बदल रहे हैं। हमारा मैंथा कारोबार पूरी तरह से विश्व बाजार पर ही आधारित है। युद्ध से प्रभाव तो पड़ेगा भी, नुकसान भी होंगे। अप्रत्यक्ष रूप से अभी से इंडस्ट्रीज पर प्रभाव दिखने लगे हैं। लोगों के रुपये फंस गए हैं। भुगतान नहीं मिलेंगे तो दिक्कतें भी सामने आएंगी। फिर ही कारोबारियों को चुनौती का सामना करना पड़ेगा।

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