डगमगाने लगी RLD की सियासी जमीन, बचा पाए केवल छपरौली का 84 साल पुराना किला
मेरठ। जैसा की सभी को पता है कि विधानसभा चुनाव का परिणाम आ चुके हैं और फिर से प्रदेश में भाजपा का कमल खिला है। सभी विपक्षी पार्टियों ने काफी तैयारियां की थी, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। अब विपक्षी पार्टियों का हाल बदल रहा है। पश्चिमी यूपी से राष्ट्रीय लोकदल (RLD) की सियासी जमीन …
मेरठ। जैसा की सभी को पता है कि विधानसभा चुनाव का परिणाम आ चुके हैं और फिर से प्रदेश में भाजपा का कमल खिला है। सभी विपक्षी पार्टियों ने काफी तैयारियां की थी, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। अब विपक्षी पार्टियों का हाल बदल रहा है। पश्चिमी यूपी से राष्ट्रीय लोकदल (RLD) की सियासी जमीन अब डगमगाने लगी है। चुनाव में सपा से गठबंधन में चुनाव लड़कर भले ही RLD ने आठ सीटें जीती हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि इस चुनाव में जाट और मुस्लिमों का गठजोड़ भी काम नहीं आया। आने वाले वक्त में RLD को OBC वर्ग की अन्य बिरादरी का भी साथ चाहिए, जो आसान नहीं लग रहा।
दिल्ली और हरियाणा की सीमा से पास बागपत को जाटलैंड की राजधानी कहा जाता है। पूर्व पीएम चौधरी चरण सिंह की बागपत संसदीय सीट रही है, जिले में छपरौली सीट है। छपरौली सीट पर अंग्रेजी राज से ही चौधरी चरण सिंह और उनके परिवार का कब्जा रहा है।
छपरौली से MLA बनकर चौधरी चरण सिंह यूपी के CM बने और फिर PM बने थे। पिछले 84 साल से छपरौली पर चौधरी परिवार का दबदबा रहा है।
पढ़ें-आगरा: दृष्टिहीन महिला के साथ आरोपी ने किया दुष्कर्म का प्रयास, पति की तहरीर पर केस दर्ज
