रायबरेली: कोरोना काल में देश छोड़कर गए जर्मन इंजीनियरों की वापसी शुरू, शीघ्र शुरू होगा रेलपहियों का निर्माण
रायबरेली। जिले के लालगंज स्थित रेल पहिया कारखाना में लिंकहाफ मैन बुश तकनीक पर बनने वाले रेलडिब्बों में लगने वाले रेल पहियों के निर्माण के लिए रेल पहिया कारखाना को जर्मन इंजीनियरों का इंतजार खत्म हो गया है। आधा दर्जन जर्मन इंजीनियर लालगंज स्थित रेलपहिया कारखाना में वापस आ चुके हैं। जिससे शीघ्र ही यहां …
रायबरेली। जिले के लालगंज स्थित रेल पहिया कारखाना में लिंकहाफ मैन बुश तकनीक पर बनने वाले रेलडिब्बों में लगने वाले रेल पहियों के निर्माण के लिए रेल पहिया कारखाना को जर्मन इंजीनियरों का इंतजार खत्म हो गया है। आधा दर्जन जर्मन इंजीनियर लालगंज स्थित रेलपहिया कारखाना में वापस आ चुके हैं। जिससे शीघ्र ही यहां पर एलएचबी रेलपहियों के निर्माण का कार्य शुरू होगा।
राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड के रेलपहिया कारखाना का शिलांयास 2013 में हुआ था। 1683 करोड़ की लागत से 27 एकड़ भूमि पर बने कारखाने में लोको एवं एलएचबी रेलपहियों का उत्पादन होना है। जर्मन इंजीनियरों की वजह से यहां पर उत्पादन में देरी होती रही। पहले मशीनों को जर्मनी से लाकर उन्हें लगाने बाद में कोरोना के चलते उनके स्वदेश चले जाने से पहिया उत्पादन धीमी गति से चलता रहा।
एक हजार लोको पहियों को तो किसी तरह बनाकर तैयार किया गया। 22 दिसंबर 2021 को 51 लोको पहियों की पहली खेप निकली। बाद में यहां से राजस्थान के अजमेर,कर्नाटक के मैसूर, तमिलनाडु के त्रिचनापल्ली आदि जगहों पर पहिए भेजे गए। दिसंबर माह में क्रिसमस का त्यौहार होने के चलते जर्मन इंजीनियर वापस स्वदेश लौट गए। लगभद दो दर्जन जर्मन इंजीनियरो में अब तक आधा दर्जन इंजीनियर ही वापस लौटे हैं।
एलएचबी रेलपहिया बनाने के लिए लोको पहिये की डाई हटाकर उसके स्थान पर एलएचबी पहिया बनाने की डाई लगानी होगी। अभी यह काम भी शुरू नही हो सका है। कारखाने के महाप्रबंधक समीर हलधर का कहना है कि आधा दर्जन जर्मन इंजीनियर आ गए हैं। जर्मन इंजीनियर पहिया निर्माण के लिए प्लान देंगे। उच्चाधिकारियों के साथ बैठक हो गयी है। शीघ्र पहिया निर्माण शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
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