अल्मोड़ा: चीन नेपाल से लगे गांवों को जल्द मिलने लगेगी मोबाइल कनेक्टिविटी

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बृजेश तिवारी, अल्मोड़ा । भारत नेपाल पर नौ हजार फिट की ऊंचाई पर बसे सीमा के अंतिम गांव नामिक समेत आसपास के सीमावर्ती गांव के लोगों को भारतीय संचार कंपनियों की कनेक्टिविटी जल्द प्राप्त होने लगेगी। इस सीमांत क्षेत्र के नामिक गांव में आजादी के करीब 75 साल की लंबी जद्दोजहद के बाद अब एक …

बृजेश तिवारी, अल्मोड़ा । भारत नेपाल पर नौ हजार फिट की ऊंचाई पर बसे सीमा के अंतिम गांव नामिक समेत आसपास के सीमावर्ती गांव के लोगों को भारतीय संचार कंपनियों की कनेक्टिविटी जल्द प्राप्त होने लगेगी। इस सीमांत क्षेत्र के नामिक गांव में आजादी के करीब 75 साल की लंबी जद्दोजहद के बाद अब एक निजी कंपनी का पहला भारतीय संचार टावर बनकर तैयार हो गया है। बिजली का कनेक्शन मिलते ही यह टावर काम करना शुरू कर देगा।

भारत नेपाल सीमा का मुनस्यारी विकास के खंड के अंतर्गत आने वाला अंतिम गांव नामिक आजादी के 75 साल बाद भी संचार और सड़क सेवाओं से वंचित है। यहां के लोगों को यह सुविधाएं ना मिल पाने के कारण आज भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन सामारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण और विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाला क्षेत्र होने के कारण यहां के लोगों की यह समस्याएं आज भी जस की तस बनी हैं। इन क्षेत्रों के लोग संचार सेवाओं की उपलब्धता की मांग को लेकर कई बार बड़े बड़े आंदोलन भी कर चुके हैं।

लेकिन इसके बाद भी आज तक यहां किसी भी भारतीय कंपनी का मोबाइल टावर नहीं लग पाया। यहां के लोगों के पास महंगे महंगे मोबाइल फोन तो हैं। लेकिन उससे बात करने के लिए उन्हें अपने घर से करीब चार पांच किलोमीटर का फासला तय करना होता है। कई परिवार तो ऐसे हैं जो आज भी आसपास के गांवों में संपर्क बनाने के लिए नेपाली सिम का सहारा लेने को मजबूर हैं। लेकिन सीमांत की इस समस्या को देखते हुए अब नामिक गांव में एक मोबाइल टावर स्थापित कर लिया गया है। ग्राम प्रधान तुलसी देवी ने बताया कि मोबाइल टावर के शुरू होने के बाद सीमांत के हजारों लोगों की एक बड़ी समस्या का समाधान हो पाएगा।

चीन, नेपाल से लगे 151 भारतीय गांवों को सुविधा देने की चुनौती
अमृत विचार, अल्मोड़ा। चीन और नेपाल की सीमा से लगे 151 भारतीय गांव ऐसे हैं जो आज भी संचार सेवाओं के लिए तरस रहे हैं। बीते दिनों भारत सरकार के अधिकारियों एक टीम ने धारचूला पहुंचकर यहां की संचार व्यवस्थाओं और सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए यहां सर्वे किया था। जिसके बाद सीमांत में एक निजी और एक भारत संचार निगम के टावर का लगना प्रस्तावित है। बताया जा रहा है कि निजी संचार सेवा का टावर बनकर तैयार हो गया है। जबकि भारत संचार निगम का टावर लगना अभी बांकी है।

राजमा और जैविक आलू उत्पादक है नामिक गांव
अमृत विचार, अल्मोड़ा।  नेपाल और चीन की सीमा से लगा अंतिम गांव नामिक राजमा और जैविक आलू उत्पादक गांव है। यहां रहने वाले 151 परिवारों के नब्बे प्रतिशत लोग कृषि करते हैं। लेकिन संचार और सड़क सुविधा ना मिल पाने के कारण आज भी इनके उत्पाद इन्हें आत्मनिर्भर नहीं बना पाए। जिस कारण इन गांवों के लोग आजादी के बाद भी पराधीनता जैसा जीवन व्यतीत करने को मजबूर हैं।

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