हल्द्वानी: हंसा मर गए, जमीन बिक गई, कातिल नहीं मिले
हल्द्वानी, अमृत विचार। चीनपुर के अरबपति किसान हंसा दत्त जोशी की मौत का रहस्य अब भी नहीं सुलझा। उनकी लाश उन्हीं के घर के बाथरूम में मिली थी और उनके कत्ल का इल्जाम उन्हीं के करीबी सोनू और अक्षय पर लगा था। मामले ने तूल पकड़ा तो एसआईटी गठित की गई, लेकिन मौत के छह …
हल्द्वानी, अमृत विचार। चीनपुर के अरबपति किसान हंसा दत्त जोशी की मौत का रहस्य अब भी नहीं सुलझा। उनकी लाश उन्हीं के घर के बाथरूम में मिली थी और उनके कत्ल का इल्जाम उन्हीं के करीबी सोनू और अक्षय पर लगा था।
मामले ने तूल पकड़ा तो एसआईटी गठित की गई, लेकिन मौत के छह माह बाद भी एसआईटी के हाथ खाली है। इस मौत के पीछे 38 बीघा जमीन की बात सामने आई थी और अब पुलिस की जांच पर सवालिया निशान लग चुका है। क्योंकि ये 38 बीघा जमीन बिक चुकी है।
मुखानी थाने में दर्ज रिपोर्ट में हंसा की बेटी सौम्या ने कहा जब वह अस्पताल पहुंचे तो वहां सोनू उर्फ शिवा गिनवाल व अक्षत वहां मौजूद थे। आरोप लगाया कि पिता हंसा चीनपुर में अकेले रहते थे और उनके अकेलेपन का फायदा उठा कर उन्हीं के करीबियों ने साथियों के साथ मिलकर साजिशन दाननामे पर रजिस्ट्री करा ली।
दाननामे और रजिस्ट्री बैनामे में लाभांवित व्यक्तियों को शंका हो गई थी कि हंसा दत्त जोशी उनके विरुद्ध जा सकते हैं और इसीलिए उनका कत्ल कर दिया गया। सौम्या ने बताया था कि उनके पिता उन्हें बताते थे कि भविष्य में भूमि का पैसा उन्हें मिलना है और इसी भुगतान से बचने के लिए दान प्राप्त व्यक्तियों व अपने-अपने नाम पर रजिस्ट्री कराने वालों ने कत्ल की साजिश रची।
पिता का कत्ल करने के बाद उन्हें अस्पताल इसीलिए ले जाया गया ताकि किसी को कत्ल का शक न हो। परिजनों को इस जमीन पर जिलाधिकारी द्वारा स्टे मिल चुका है और ये स्टे भी हंसा की मौत से करीब एक हफ्ता पहले मिला था। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि दान की जमीन को टुकड़ों-टुकड़ों में कैसे बेच दिया गया। न सिर्फ बेचा गया, बल्कि उसकी 143 और रजिस्ट्री भी करा ली गई। जो दान की जमीन पर नहीं की जा सकती। बात अगर नियमों की करें तो हंसा अपनी जमीन को अपने ही ब्लड रिलेशन में दान कर सकते हैं। जबकि ऐसा हुआ नहीं।
बता दें कि हंसा की मौत के बाद उनके शव का दो बार पोस्टमार्टम कराया गया और पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उलझ कर रह गई। मुखानी पुलिस से बात नहीं बनी तो मामले में एसओजी को लगाया गया। एसओजी ने भी अपनी ओर से पूरी कोशिश कर ली और सफलता हाथ नहीं लगी। जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी। अब इस मामले को छह माह से ज्यादा का वक्त गुजर चुका है, लेकिन यह साबित नहीं हो सका कि हंसा की मौत एक हादसा था या फिर हत्या। हालांकि इस मामले में मुखानी थाने में दो लोगों के खिलाफ हत्या की नामजद रिपोर्ट दर्ज है।
