हल्द्वानी: जेल में ड्रग पेडलर्स की पाठशाला, तैयार हो रही नई गैंग
हल्द्वानी, अमृत विचार। पुलिस ने हाल में स्मैक और चरस के कारोबार से जुड़े लोगों का बड़ा रैकेट तोड़ा। इस बड़े रैकेट में कोई बहुत बड़ा सरगना तो पुलिस के हत्थे नहीं लेकिन लोकल पैडलर्स को सलाखों के पीछे पहुंचाने में पुलिस कामयाब रही। हालांकि आने वाले कुछ माह के बाद जेल में बंद यही …
हल्द्वानी, अमृत विचार। पुलिस ने हाल में स्मैक और चरस के कारोबार से जुड़े लोगों का बड़ा रैकेट तोड़ा। इस बड़े रैकेट में कोई बहुत बड़ा सरगना तो पुलिस के हत्थे नहीं लेकिन लोकल पैडलर्स को सलाखों के पीछे पहुंचाने में पुलिस कामयाब रही। हालांकि आने वाले कुछ माह के बाद जेल में बंद यही ड्रग पेडलर्स पुलिस के सिर का दर्द बन सकते हैं। खबर है कि छोटे-छोटे ड्रग पेडलर्स का जेल में गठजोड़ हो चुका है और यह गठजोड़ नए गैंग में तब्दील हो सकता है।
डीआईजी निलेश आनंद भरणे की मानें तो पुलिस स्मैक और चरस को लेकर लगातार कार्रवाई कर रही है। पकड़ में आने वाले लोगों में युवाओं की संख्या अधिक है। इन युवाओं को गिरफ्तार कर जेल पहुंचा दिया है और ये सिलसिला लगातार जारी है। जेल में इन्हें स्मैक और चरस के धंधे से जुड़े नए लोग मिल जाते हैं। जेल में ये धंधे के नए तौर-तरीके सीख कर बाहर निकलते हैं और कई दफा तो जेल में ही गैंग बन जाते हैं।
बता दें कि पहाड़ और पहाड़ से जुड़े मैदानी जिलों में आसानी से मुहैया होने वाली चरस के बीच स्मैक के कारोबार ने अपनी जड़े तेजी से जमाई हैं। पिछले 5 से 7 साल में स्मैक के कारोबार की रफ्तार ने पुलिस को भी हैरत में डाल दिया है और इसकी वजह हैं पहाड़ का बेरोजगार युवा, जो कम समय में अमीर बनने के लिए इस धंधे की दलदल में धंसते जा रहे हैं। डीआईजी निलेश आनंद भरणे इसको लेकर संजीदा हैं और कोशिश कर रहे हैं कि कैसे ड्रग माफिया और पहाड़ के युवाओं के बीच की कड़ी को तोड़ा जाए।
डीआईजी निलेश आनंद भरणे ने बताया कि बीते सालों में पहाड़ पर स्मैक का चलन तेजी से बढ़ा है। पहाड़ी युवाओं के साथ नाबालिग और किशोर स्मैक के धंधे जुड़ रहे हैं। ड्रग माफिया इन्हें स्मैक एक स्थान से दूसरे स्थान पहुंचाने के लिए मोटी रकम अदा करते हैं। इन्हीं युवाओं की स्थानीय स्तर पर छोटी-छोटी टीमें हैं, जो न सिर्फ इस नशे के आदी है बल्कि नशा बेचने वाले भी यही है। दो से तीन बार इन ड्रग पेडलर्स को मुफ्त नशा दिया जाता है और स्मैक के लती होते ही इनसे मनचाहा काम लिया जाता है। हल्द्वानी में स्मैक की एक पुड़िया 150 से 200 रुपए में आसानी से मिल जाती है लेकिन इसी पुड़िया की पहाड़ पर दो गुनी कीमत हो जाती है।
जेल से निकलने वालों की जा रही निगरानी
हल्द्वानी। डीआईजी ने बताया कि जिन्हें एनडीपीएस में जेल भेजा गया है, उनके छूटने पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। युवाओं को नशा और नशा बेचने दूर रखने के लिए काउंसिलिंग कराई जाती है। कोशिश यह भी है कि जो नशे की लत में बुरी तरह फंस चुके हैं, उन्हें नशा मुक्ति केंद्र तक ले जाया जा सके। ताकि वह फिर से सामान्य जीवन जी सकें।
इंसान को रोबोट बना देती है स्मैक की लत
हल्द्वानी। अफीम और स्मैक की लत लगने के बाद इंसान खुद का नहीं रहता। लती व्यक्ति लत पूरी करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। मसलन, वो अपनी लत पूरी करने के लिए किसी की हत्या करने से भी नहीं चूकता। इससे समझा जा सकता है कि ड्रग माफिया नशे के आदी ऐसे लोगों का इस्तेमाल किस हद तक कर सकता है। एक तरह से नशे का आदी आदेश मानने वाला रोबोट बन जाता है।
पहाड़ के युवा जल्द अमीर बनने के लिए शार्टकट ले रहे हैं और यह चिंता का विषय है। पुलिस अपने स्तर पर इन्हें सुधारने और ड्रग नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने में जुटी है। काम आसान नहीं है लेकिन हम जल्द इस नेटवर्क को समाप्त कर देंगे।
निलेश आनंद भरणे, डीआईजी, कुमाऊं
