हल्द्वानी: इलेक्ट्रिक वाहनों को पहाड़ पर दौड़ाने की तैयारी

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

बबीता पटवाल, अमृत विचार, हल्द्वानी। राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहनों को दौड़ाने की तैयारी है। पर्यावरण संरक्षण को बल देने और आर्थिकी सुधारने की पहल के लिये परिवहन विभाग द्वारा इलेक्ट्रिक वाणिज्यिक वाहन व ऑटो लॉन्च करने की कवायद शुरू कर दी गयी है। पिछले सप्ताह दिल्ली में आयोजित ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़े …

बबीता पटवाल, अमृत विचार, हल्द्वानी। राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहनों को दौड़ाने की तैयारी है। पर्यावरण संरक्षण को बल देने और आर्थिकी सुधारने की पहल के लिये परिवहन विभाग द्वारा इलेक्ट्रिक वाणिज्यिक वाहन व ऑटो लॉन्च करने की कवायद शुरू कर दी गयी है। पिछले सप्ताह दिल्ली में आयोजित ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़े उद्यमियों और परिवहन मंत्रालय के अधिकारियों की बैठक में आरटीओ कुमाऊं संदीप सैनी ने भी हिस्सा लिया।

पर्वतीय इलाकों पर खास जोर
आरटीओ कुमाऊं संदीप सैनी के अनुसार, बैठक में पर्वतीय क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहनों का रोड मैप तैयार करने के साथ उनके रखरखाव को लेकर चर्चा की गई। उनकी तरफ से वर्तमान में पर्वतीय क्षेत्रों में केवल वाणिज्यिक वाहनों व ऑटो इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया, जिस पर विचार चल रहा है
बनेंगे चार्जिंग पावर स्टेशन
गुरुग्राम में देश का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन है, जिसकी तरह उत्तराखंड में भी पावर स्टेशन बनाने की योजना है। आरटीओ संदीप सैनी ने बताया कि इन पावर स्टेशनों से इलेक्ट्रिक वाहन चौबीस घंटे चार्ज हो सकेंगे। इन स्टेशनों में सभी तरह की चार्जिंग की सुविधा होगी।

2018 में मंजूर हो चुकी नीति
इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड सरकार वर्ष 2018 में इलेक्ट्रिक वाहन नीति को मंजूरी दे चुकी है। उस समय के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में इस पर मुहर लगी थी। नई नीति में राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण, असेम्बलिंग और उपयोग को बढ़ावा दिया जाना है।

इलेक्ट्रिक बस का तो ट्रायल ही हो पाया
देहरादून-मसूरी के बीच सफल संचालन के बाद इलेक्ट्रिक बस को हल्द्वानी लाया गया था। काठगोदाम डिपो से 9 दिसंबर 2018 को हल्द्वानी-नैनीताल मार्ग पर इसे एक माह के लिए ट्रायल के तौर पर चलाया गया। 9 जनवरी 2019 को इसकी ट्रायल अवधि समाप्त हो गई। 13 दिन तक इलेक्ट्रिक बस काठगोदाम वर्कशॉप में रही। ट्रायल तो सफल रहा लेकिन तीन साल पूरे होने के बाद भी आज तक इलेक्ट्रिक बस का संचालन नहीं हो पाया। ऐसे में अब परिवहन विभाग केवल छोटे इलेक्ट्रिक वाहनों को ही लाने की तैयारी में है।

संबंधित समाचार