बाराबंकी: किसान ने डीजल पंपिंग सेट को एलपीजी से चला कर सिखाई नई राह, होगी घंटों की बचत

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बाराबंकी। केंद्र व राज्य की सरकारें आए दिन जहां बढ़ते डीजल-पेट्रोल के दामों पर लगाम लगाने में असमर्थ जान पड़ रही है। वहीं दूसरी तरफ किसानों की इस समस्या से निजात दिलाने के लिए बाराबंकी जनपद के फतेहपुर क्षेत्र के रहने वाले एक किसान ने अपने खेतों को सींचने के लिए एक नया तरीका इजाद …

बाराबंकी। केंद्र व राज्य की सरकारें आए दिन जहां बढ़ते डीजल-पेट्रोल के दामों पर लगाम लगाने में असमर्थ जान पड़ रही है। वहीं दूसरी तरफ किसानों की इस समस्या से निजात दिलाने के लिए बाराबंकी जनपद के फतेहपुर क्षेत्र के रहने वाले एक किसान ने अपने खेतों को सींचने के लिए एक नया तरीका इजाद किया है। जिसकी क्षेत्र के साथ-साथ जिले तक प्रशंसा हो रही है।

बता दें कि तहसील फतेहपुर के ग्राम मसूरिया के रहने वाले राजेंद्र प्रसाद पुत्र रामसागर उम्र 34 वर्ष जिन्होंने मात्र कक्षा 5 तक की शिक्षा ग्रहण की है। उन्होंने आए दिन बढ़ते डीजल के दामों को देखते हुए अपने खेतों की पर्याप्त सिचाई के लिए एक नई तकनीक को खोजा है। राजेंद्र ने एलपीजी गैस सिलेंडर में जिस प्रकार रेगुलेटर का प्रयोग होता है। उसी प्रकार गैस सिलेंडर में लगा कर पंपिंग सेट के स्लेटर में रेगुलेटर और पाइप को लगाकर पंपिंग सेट को स्टार्ट कर दिया। राजेंद्र प्रसाद ने बताया 14.20 किलो का रसोई गैस सिलेंडर लगातार 38 घंटे तक खेतों को पानी देता रहता है।

1 घंटे में गैस से इंजन चलाने पर 50 से ₹60 का खर्च आता है

औसतन 1 घंटे में गैस से इंजन चलाने पर 50 से ₹60 का खर्च आता है। जबकि डीजल से चलाने पर लगभग ₹100 का खर्च आता है। इस तरीके से जहां हमें प्रति घंटे करीब 40 से ₹50 की बचत हो जाती है वही पंपिंग सेट को गैस द्वारा चलाए जाने से पंपिंग सेट कार कार्बन युक्त धुआं न देकर प्रदूषण मुक्त रहता है।

बताते चलें राजेंद्र द्वारा निजात की गई तकनीक का प्रयोग अगर प्रत्येक किसान करने लगे तो उसकी खेतों की सिंचाई का खर्च आधा हो जाएगा। जिससे एक तरफ यह किसान भाइयों के चेहरे पर खुशी आएगी। तो वहीं दूसरी तरफ पंपिंग सेट से निकलने वाले कच्चे धुयें से फैलने वाले प्रदूषण पर भी रोक लग सकेगी।

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