अयोध्या: कभी कलकल करती तमसा, आज भर रही सिसकियां
अयोध्या। कभी कलकल कर बहने वाली तमसा आज अपनी दुर्दशा पर सिसक-सिसक कर रो रही है। उसे अपने तारनहार भगीरथ का इन्तजार है, जो उसे इस हाल से मुक्ति दिला सके। आखिर कौन होगा उसका तारनहार। कौन बनेगा भगीरथ। क्या कभी उसका उद्धार नहीं होगा। क्या इसी तरह सिसक-सिसक कर दम तोड़ देगी यह नदी। …
अयोध्या। कभी कलकल कर बहने वाली तमसा आज अपनी दुर्दशा पर सिसक-सिसक कर रो रही है। उसे अपने तारनहार भगीरथ का इन्तजार है, जो उसे इस हाल से मुक्ति दिला सके। आखिर कौन होगा उसका तारनहार। कौन बनेगा भगीरथ। क्या कभी उसका उद्धार नहीं होगा। क्या इसी तरह सिसक-सिसक कर दम तोड़ देगी यह नदी। यह सवाल सबके जेहन में कौंध रहा है।
कभी लोग इसके जल से स्नान, ध्यान, खेतों की सिंचाई के साथ राहगीर अपनी प्यास बुझाया करते थे, लेकिन आज इसके जल को छूने से भी परहेज करने लगे हैं। पौराणिक नदियों में शुमार तमसा नदी के तट पर स्थित महादेवा घाट पर चौरासी कोसी परिक्रमा का पड़ाव स्थल भी है, जहां साधु-संत रात्रि विश्राम कर दूसरे दिन पवित्र तमसा में स्नान कर आगे की यात्रा पर रवाना होते थे, लेकिन अब स्नान की कौन कहे आचमन भी नहीं करते है और आगे बढ़ जाते है। रामायण के अनुसार वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के साथ प्रथम प्रवास यहीं पर किया था। चौरासी कोसी परिक्रमा में अब कुछ ही दिन शेष है, लेकिन अभी तक किसी को इसकी फिक्र नही है।
खबर भर बनने को सफाई में जुटते हैं संगठन
मालूम हो कि अयोध्या जनपद के मवई ब्लाक के बेसौढी नदी से निकलकर अंबेडकरनगर होते हुए आजमगढ़ को जाने वाली तमसा नदी के वजूद पर ही संकट मंडरा रहा है। मजदूर दिवस के नाम पर कुछ सामाजिक व राजनीतिक लोग इसकी साफ-सफाई के लिए आगे आये, लेकिन फोटो खिचवाने और पेपर में नाम निकलवाने के बाद गायब हो गये। केंद्र और प्रदेश की सरकार लाख नदियों की साफ सफाई की बात करे, लेकिन जब नजर इधर जाती है तो उनके दावे की पोल खुल जाती है। तमसा सफाई अभियान को लेकर बनी कमेटी तमसा बचाओ संघर्ष समिति ने बाकायदा मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री व इलाकाई विधायक सांसद सहित जिले के आला हुक्मरानों को दर्जनों पत्र भेज कर उनसे नदी की सफाई व अतिक्रमण मुक्त कराने के साथ चौड़ीकरण कर साफ पानी छोड़े जाने की मांग की, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली।
डीएम अनिल ने ली थी सुध
अलबत्ता विगत वर्ष डीएम रहे डॉ. अनिल कुमार पाठक ने भगीरथ बनकर इस नदी का उद्धार करने का संकल्प लिया तो लोगों में फिर एक आस जागी कि अब तमसा नदी अपनी पूर्व स्थित में आ जायेगी, लेकिन उनका तबादला होते ही मामला ठप हो गया।
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