रानीखेत-खैरना स्टेट हाईवे के बुरे हाल, खतरनाक स्थानों पर संकेतांक तक नहीं
गरमपानी, अमृत विचार। रानीखेत-खैरना स्टेट हाईवे पर जगह-जगह खतरा है, बावजूद संबंधित विभाग ने संकेतांक नहीं लगाये हैं। रात के समय जोखिम दोगुना बढ़ जाता है। व्यापारियों ने संबंधित विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। बीते वर्ष अक्टूबर में हुई मूसलाधार बारिश से सामरिक व पर्यटन दृष्टि से महत्वपूर्ण रानीखेत-खैरना स्टेट हाईवे को भारी …
गरमपानी, अमृत विचार। रानीखेत-खैरना स्टेट हाईवे पर जगह-जगह खतरा है, बावजूद संबंधित विभाग ने संकेतांक नहीं लगाये हैं। रात के समय जोखिम दोगुना बढ़ जाता है। व्यापारियों ने संबंधित विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
बीते वर्ष अक्टूबर में हुई मूसलाधार बारिश से सामरिक व पर्यटन दृष्टि से महत्वपूर्ण रानीखेत-खैरना स्टेट हाईवे को भारी नुकसान पहुंचा था।
खैरना से कुछ आगे करीब पांच सौ मीटर स्टेट हाईवे कोसी नदी में ढह गया था। बमुश्किल पहाड़ी काट आवाजाही सुचारू की गई। मल्ला व तल्ला पातली, बजोल तथा बमस्यू आदि क्षेत्रों में भी जगह-जगह स्टेट हाईवे भूधंसाव की जद में है। संबंधित विभाग ने स्टेट हाईवे की मरम्मत तो दूर खतरे वाले स्थानों पर संकेतांक भी नहीं लगाये हैं।
व्यापारी नेता विरेंद्र बिष्ट, महेंद्र सिंह, कुबेर सिंह जीना, हरीश चंद्र, पंकज भट्ट, पंकज नेगी, हरीश कुमार, गजेंद्र नेगी, मनोज पडलिया, दलीप सिंह, मदन मोहन सुयाल, अंकित सुयाल, मनीष कर्नाटक आदि ने मरम्मत होने तक खतरे वाले स्थानों पर संकेतांक लगाये जाने की मांग उठाई है।
