नैनीताल: अधर में लटका वन विभाग का पिरूल से रोजगार देने का सपना
नैनीताल, अमृत विचार। नैनीताल वन प्रभाग की पिरूल से स्वरोजगार देने की योजना अधर में लटक गई है। उत्तराखंड के प्रमुख वन संरक्षक (पीसीसीएफ) का मामला हाईकोर्ट में होने के कारण वन विभाग को इस योजना के लिए बजट नहीं मिल पा रहा है। जिससे कई ग्रामीणों की उम्मीदों पर झटका लगा है। मालूम हो …
नैनीताल, अमृत विचार। नैनीताल वन प्रभाग की पिरूल से स्वरोजगार देने की योजना अधर में लटक गई है। उत्तराखंड के प्रमुख वन संरक्षक (पीसीसीएफ) का मामला हाईकोर्ट में होने के कारण वन विभाग को इस योजना के लिए बजट नहीं मिल पा रहा है। जिससे कई ग्रामीणों की उम्मीदों पर झटका लगा है।
मालूम हो कि 15 फरवरी से फायर सीजन के शुरू होते ही नैनीताल वन प्रभाग की ओर से पिरूल से स्वरोजगार देने की योजना की घोषणा की गई थी। जिसके तहत वनाग्नि की संभावित घटनाओं को लेकर वन विभाग के अधिकारियों ने कहा था कि इस बार पिरूल से रोजगार योजना वनाग्नि नियंत्रण के लिए बेहद सहायक साबित होगी, जिसके लिए नैनीताल वन प्रभाग व्यापक तैयारियों में जुटा हुआ था। सात रेंजों में इस योजना के प्रचार-प्रसार के साथ ही ग्रामीणों को इससे जोडऩे की कवायद भी की जा रही थी।
फरवरी माह में डीएफओ बीजू लाल ने योजना की जानकारी देते हुए बताया था कि प्रभाग के सात रेंजों में रेंजर ग्रामीण महिला समूहों और युवक मंगल दलों से संपर्क साध कर रेंज स्तर पर ग्रामीणों के साथ बैठक कर जन सहभागिता बढ़ाई जायेगी।
ग्रामीणों द्वारा एकत्रित होने वाले पिरूल के लिए छह रुपये प्रति किलो के भाव से ग्रामीणों को भुगतान किया जाना था। इसमें तीन रुपया वन विभाग, जबकि तीन रुपया अनुबंधित सेंचुरी पेंपर मिल देने की बात कही गई थी। लेकिन फिलहाल बजट न मिलने के कारण यह योजना अधर में लटक गई है। पीसीसीएफ के मामले की सुनवाई के बाद ही इस योजना पर कार्य हो पाएगा।
डीएफओ बीजू लाल ने बताया कि कैंपा से 5 लाख का बजट मिलना था। लेकिन वर्तमान में पीसीसीएफ का पद रिक्त होने के कारण बजट को लेकर औपचारिकताएं पूरी नहीं हो पा रही है, जिससे यह योजना फिलहाल के लिए शुरू नहीं की जा सकेगी।
