कानपुर: GSVM मेडिकल कॉलेज में फर्जी लेटर से एमबीबीएस में प्रवेश लेने पहुंचीं दो और छात्राएं, जांच में जुटी पुलिस
कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में फर्जी दस्तावेजों के सहारे एमबीबीएस में एडमिशन दिलाने का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। रुड़की की छात्रा से हुई ठगी का केस अभी सही तरीके से शुरू भी नहीं हुआ था कि सोमवार को दिल्ली और बिजनौर की दो छात्राएं भी परिजनों संग दाखिले लेने के लिए …
कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में फर्जी दस्तावेजों के सहारे एमबीबीएस में एडमिशन दिलाने का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। रुड़की की छात्रा से हुई ठगी का केस अभी सही तरीके से शुरू भी नहीं हुआ था कि सोमवार को दिल्ली और बिजनौर की दो छात्राएं भी परिजनों संग दाखिले लेने के लिए कॉलेज पहुंचीं।
उनके दस्तावेज देखते ही मेडिकल कॉलेज के अधिकारी सकते में आ गए, जिसमें कॉलेज की वेबसाइट, पिन कोड और प्रिंसिपल के हस्ताक्षर गलत थे। पत्र का प्रारूप भी बिलकुल अलग था। मामले की जानकारी प्रिंसिपल प्रो. संजय काला को दी गई। काउंसिलिंग प्रभारी व पैथोलॉजी विभाग की एचओडी प्रो. सुमनलता वर्मा ने दस्तावेजों को चेक किया। स्वरूप नगर पुलिस को भी बुला लिया गया।
प्रो. संजय काला ने छात्राओं से पूछताछ की, जिसमें दिल्ली के द्वारिका के डॉ. जसबीर सिंह व मधु चौहान की पुत्री विनम्रता सिंह और बिजनौर के नगीना के नरेंद्र दास की बेटी शिवानी दास की पुष्टि हुई। प्रो. सुमनलता वर्मा ने बताया कि ज्वाइनिंग लेटर का फार्मेट देखते ही गड़बड़ी का पता लग गया था। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज का प्रारूप बिल्कुल अलग है। उसमें प्रिंसिपल के साथ ही स्वयं उनके भी हस्ताक्षर रहते हैं।
250 में से 249 सीटें पहले ही भरीं
प्रो. संजय काला ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की यूजी की 250 सीटों में से 249 में पहले ही दाखिले हो चुके हैं। कुछ दिन पहले ही रुड़की की ऐसी ही छात्रा का मामला आया था। सोमवार को दो और केस आ गए। अभी कई केस और आने की आशंका है। कॉलेज के अधिकारियों को दस्तावेजों को सही तरीके से जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस और प्रशासन को पत्र लिखा गया है।
डीजीएमई के अधिकारी बन लिए रुपये
मधु चौहान ने पुलिस को बताया कि उनके पति डॉक्टर हैं, जबकि वह शिक्षिका हैं। उनके पास नवंबर से कॉल आ रही थी, जिसमें फोन करने वाला सरकारी कॉलेज में एडमिशन कराने की बात कह रहा था। पिछले महीने कई बार फोन आए। उन्होंने संपर्क किया तो उसने पहले पंजीयन, काउंसिलिंग और च्वाइस फिलिंग भरने की बात कही। ठगी करने वाले ने खुद की सेटिंग स्वास्थ्य महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा (डीजीएमई) विभाग में होने का दावा किया।
उसने एक लाख रुपये लिए। कुछ दिन बाद कागजात दिखाए, जिसमें नीट की रैंक, स्कोर कार्ड, दसवीं और बारहवीं के अंक लिखे हुए थे। बेटी ने फोटो खींचने का प्रयास किया तो जबरन फोटो डिलीट करा दी। यह खेल गाजियाबाद के वैशाली के क्लाउड 9 टावर में हुआ। कुछ दिन बाद डीजीएमई के अधिकारी को रुपये दिए गए। कुल 32 लाख रुपये दिए गए। शिवानी दास से 50 हजार रुपये लिए जाने का पता चला है।
गवर्नमेंट नॉमिनी कोटा के नाम पर खेल
प्रो. संजय काला ने बताया कि गवर्नमेंट नॉमिनी कोटा के नाम पर खेल चल रहा है। इसमें शामिल लोगों को छात्र-छात्राओं की पूरी जानकारी रहती है। इनके तार कोचिंग सेंटरों से जुड़े हुए हो सकते हैं। नीट के आयोजन के बाद से ही छात्रों को कॉल करना शुरू कर देते हैं।
पूछताछ में तीनों छात्राओं ने बताया कि रकम लेने वाले ने उनसे गनर्वमेंट नॉमिनी कोटा के नाम पर रुपये लिए। उन्हें यह सीटें मृत सैनिकों और स्वतंत्रता सैनिकों के घरवालों के लिए बताई गई थी, जिसमें सीटें न भरने पर सामान्य श्रेणी का हो जाने का हवाला दिया गया। रुपये लेने वाले ने डॉक्टर अग्रवाल नाम का जिक्र किया था।
यह भी पढ़ें: रामपुर : दो ट्रकों की भिड़ंत के बाद आग में जिंदा जल गया चालक, दूसरे ने भागकर बचाई अपनी जान
