हल्द्वानी में सट्टे और जुए का खेल ! पुलिस आगे से और सत्ता के खिलाड़ी पीछे के गेट से निकल गए

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

हल्द्वानी, अमृत विचार। जब सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का… आपने यह कहावत कई बार सुनी होगी, बृहस्पतिवार को हल्द्वानी में यह कहावत चरितार्थ हो गई। सट्टा और जुए की सूचना पर केमू स्टेशन के पास एक होटल में दबिश देने गई पुलिस ने सत्ता पक्ष से जुड़े नेताओं को बचाने में कोई कसर …

हल्द्वानी, अमृत विचार। जब सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का… आपने यह कहावत कई बार सुनी होगी, बृहस्पतिवार को हल्द्वानी में यह कहावत चरितार्थ हो गई। सट्टा और जुए की सूचना पर केमू स्टेशन के पास एक होटल में दबिश देने गई पुलिस ने सत्ता पक्ष से जुड़े नेताओं को बचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

केमू स्टेशन के पास होटल के बाहर खड़ी सीओ वनभूलपुरा की गाड़ी।

भरी दोपहर हल्द्वानी के केमो स्टेशन के पास एक होटल में जुए और सट्टे की सूचना पर बनभूलपुरा और सिटी पेट्रोलिंग की टीम पहुंची। करीब आधे घंटे तक बनभूलपुरा एसओ और एसओजी की टीम होटल के अंदर बंद कमरे में जांच करते रहे। इस दौरान होटल के भीतर मीडिया कर्मियों के आने पर पाबंदी लगा दी गई। होटल के सामने की दुकानों के बाहर लोगों की एक टक निगाहें पुलिस और आरोपियों पर टिकी रही।

करीब आधे घंटे बाद बनभूलपुरा एसओ नीरज भाकुनी हंसते हुए होटल से बाहर निकले और दूसरी तरफ सत्ता पक्ष से जुड़े लोग होटल के पीछे के दरवाजे से बाहर निकल गए। एसओ नीरज भाकुनी के हाव-भाव और शैली से ऐसा लगा मानो पुलिस होटल में महज समय बिताने गई थी और होटल में सट्टा, जुए जैसी कोई गतिविधि नहीं चल रही थी।

होटल के रिसेप्शन में खड़े पुलिस के जवान।

ताज्जुब की बात ये है कि होटल में सट्टा और जुए की जानकारी पूरे शहर को हो गई, लेकिन सीओ सिटी भूपेंद्र सिंह धोनी ने पूरे मामले से अनभिज्ञता जताने में जरा भी देर नहीं लगाई। ऐसे में कार्रवाई की बात तो कोसों दूर थी।

खैर, सट्टे और जुए से जुड़े मामलों में पत्रकार वार्ता करने में जरा भी देर नहीं लगाने वाली पुलिस की कार्यशैली आज पूरे शहर में चर्चा का केंद्र बनी रही। आरोप लगे कि पुलिस ने सत्ता पक्ष के दबाव में सबकुछ देखते हुए भी कुछ नहीं देखा। होटल में लाव लस्कर के साथ पुलिस ने इंट्री जरुर मारी लेकिन कुछ घंटों की मंत्रणा के बाद पुलिस आगे के गेट से और सत्ता के खिलाड़ी पीछे के गेट से निकल गए। मामले में एसएसपी पंकज भट्ट ने बताया कि सूचना पर पुलिस ने दबिश थी। लेकिन, वहां सट्टे जैसा कुछ नहीं मिला।

करीब आधे घंटे तक जांच के बाद होटल के मुख्य द्वार से बाहर निकलती पुलिस।

चर्चा है कि होटल में लंबे समय से सट्टे का संचालन किया जा रहा है। लेकिन पुलिस ने सत्ता पक्ष के दबाव में आरोपियों को बचाने का काम किया है।

लोग यह भी चर्चा करते देखे गए कि पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों ने अपने ट्रांसफर के भय के चलते सत्ता पक्ष के दबाव में आरोपियों पर कार्रवाई नहीं की है। बहरहाल पुलिस और सत्ताधारी पार्टी के नेताओं से जुड़ा यह मामला आम जन और सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है।

संबंधित समाचार