हल्द्वानी: ‘सात उच्चके’ से मिलती कहानी, यशपाल बन बैठा करोड़पति
हल्द्वानी, अमृत विचार। रमाला, बागपत निवासी यशपाल की कहानी फिल्म ‘सात उच्चके’ से मिलती जुलती है। इस करोड़पति गैंगस्टर का कहानी रील लाइफ से कम नहीं, लेकिन असलियत में इसने लोगों को ठगते हुये पूरा एंपायर खड़ा कर लिया। गौरतलब है कि यशपाल की आपराधिक गतिविधियों से अर्जित की गई अब तक ज्ञात करीब 153 …
हल्द्वानी, अमृत विचार। रमाला, बागपत निवासी यशपाल की कहानी फिल्म ‘सात उच्चके’ से मिलती जुलती है। इस करोड़पति गैंगस्टर का कहानी रील लाइफ से कम नहीं, लेकिन असलियत में इसने लोगों को ठगते हुये पूरा एंपायर खड़ा कर लिया। गौरतलब है कि यशपाल की आपराधिक गतिविधियों से अर्जित की गई अब तक ज्ञात करीब 153 करोड़ रुपये से ज्यादा की चल-अचल संपत्ति कुर्की की कार्यवाही शुरू हो गयी है।
एसएसपी, एसटीएफ, अजय सिंह के अनुसार, बीते वर्ष यशपाल पर ज्वालापुर थाने में एक बड़े व्यापारी को उसकी संपत्ति हड़पने के लिये धमकी देने का केस दर्ज हुआ था। इसकी जांच में शातिर यशपाल के कारनामों की ऐसी कहानी प्रकाश में आई जो बॉलीवुड की फिल्म “सात उच्चके” से मिलती जुलती थी, जिसमें किरदार किसी की सम्पत्ति हड़पने के लिये या किसी पर दबाव बनाने के लिये या किसी को जेल भेजने के लिये एक काल्पनिक घटना को स्टोरी बनाकर पुलिस के सामने इस तरह प्रस्तुत करता है कि वो तथ्यों के आधार पर बिलकुल सच लगे और निर्दोष व्यक्ति के विरूद्ध मुकदमा दर्ज कराकर उसे जेल भेज दिया जाता है, फिर खेल शुरू होता है जेल जाने वाले व्यक्ति को अपने इशारों में चलाने का।
इसी साल जनवरी के अंत में लोगों की जमीनें हड़पने और उन पर दबाव बनाने के लिए महिलाओं के माध्यम से झूठे मुकदमे लिखवाने वाले गिरोह के चार सदस्यों के खिलाफ हरिद्वार पुलिस ने गैंगस्टर की कार्रवाई की थी। गिरोह के मास्टरमाइंड यशपाल तोमर को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी थी। पुलिस ने यशपाल के साथ शामिल तीन अन्य लोगों के खिलाफ भी गैंगस्टर की कार्रवाई की थी। इनमें धीरज कुमार निवासी हनुमानगढ़, राजस्थान, गिरधारी चावला निवासी निर्माण विहार दिल्ली और गिरधारी का बेटा सचिन शामिल हैं।
यह संपत्ति आयी सामने
1. ग्राम चिटेहरा, दादरी, जीबीनगर, 10 भू-सम्पत्ति 1.3736 हेक्टयेर अनुमानित कीमत 63 करोड रुपये, ससुर ज्ञान चन्द्र के नाम से
2. दिल्ली, लोनी, गाजियाबाद व बरवाला जनपद बागपत में 03 भू-सम्पत्ति, 4188.33 वर्ग गज एवं 130.05 स्क्वायर मीटर करीब 16 करोड़ रुपये की सम्पत्ति पत्नी अंजना तोमर के नाम से
3. हरिद्वार में करीब 2.455 हेक्टयेर भूमि कीमत करीब 72 करोड़ रुपये साले अरुण कुमार के नाम से
4. रमाला, बागपत में 02 भू-सम्पत्ति करीब 12.477 हेक्टयेर एवं 148.61 वर्ग गज कीमत करीब 98 लाख रुपये, भाई नरेश के नाम से
5. रमाला में 01 भू-सम्पत्ति करीब 472.50 वर्ग गज कीमत करीब 20 लाख रुपये भाई ओमबीर के नाम से
6. बैंक खाते: 05 जो यशपाल तोमर व परिवार के सदस्यों के नाम हैं
पुलिस की गतिविधियां जानता था
यशपाल परिवार में पांच भाईयों के पास करीब 09 बीघा जमीन थी। वहीं से यशपाल थाना बरवाला के एक तत्कालीन पुलिस अधिकारी के सम्पर्क में आया और पुलिस की सारी गतिविधियों करीब से जानकर एक सफेदपोश शातिर अपराधी बन गया जिसने अब तक करीब 153 करोड़ की सम्पत्ति विभिन्न राज्यों में अपने एवं अपने निकट रिश्तेदारों के नाम पर अर्जित कर ली। यशपाल पर पुलिस पर हमला करने का पहला केस वर्ष 2002 में थाना कोतवाली हरिद्वार में दर्ज हुआ था।
उसने जेल में रहकर अपना नेटवर्क स्थापित किया। वर्ष 2004 में हरिद्वार के एक व्यापारी के विरूद्ध थाना सरसावा व साहिबाबाद थाने में अपने साथियों के साथ मिलकर अपहरण व बलात्कार का फर्जी मुकदमा दर्ज करा दिया गया जिस मुकदमें की आड़ में उस पर समझौते का दबाव बनाकर उसकी भूपतवाला स्थित करोडो की जमीन को औने पौने दाम में खरीद अपने सहयोगी के नाम पर करा लिया।
इसके बाद यशपाल तोमर ने उपरोक्त मोडस अपरेन्डी का प्रयोग करते हुये इस प्रकार के अपराध करने के लिये एक बड़ा नेटवर्क स्थापित कर लिया। उत्तराखण्ड, उत्तरप्रदेश, पंजाब तथा राजस्थान राज्य के विभिन्न थानों में अलग-अलग भोले-भाले व्यापारियों/किसानों के विरुद्ध काल्पनिक स्टोरी बनाकर दुष्कर्म, जान से मारने का प्रयास, छेडछाड, चोरी आदि के विभिन्न मुकदमें दर्ज कराये गये। इसके गैंग में सहयोगी के रूप में कई अन्य पुरुष व महिलायें भी शामिल हैं।
महिलायें यशपाल तोमर की प्लानिंग के अनुसार दुष्कर्म और छेड़खानी के अभियोग दर्ज कराया करती थीं। बाद में इन मुकदमों की आड़ में यशपाल तोमर समझौते के नाम पर उनसे उनकी सम्पत्ति को हासिल कर लेता था। एसटीएफ ऐसे 13 मुकदमों की जांच कर रही है, जिनमें एक थाना ब्रह्मपुरी, मेरठ में भी है।
