हल्द्वानी: मुख्यमंत्री जी! नौकरशाह कर रहे सरकार और न्यायालय को गुमराह, आखिर ऐसा क्यों बोले पेंशनर्स ? देखें VIDEO
हल्द्वानी, अमृत विचार। नैनीताल हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन से गोल्डन कार्ड के नाम पर प्रतिमाह की जा रही धनराशि की कटौती पर रोक लगाने का फैसला किया था। फैसले में अदालत ने कहा कि पेंशन सेवानिवृत्त कर्मचारियों की व्यक्तिगत संपति है। सरकार उन पर यह कटौती जबरन लागू नहीं कर सकती। इस फैसले …
हल्द्वानी, अमृत विचार। नैनीताल हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन से गोल्डन कार्ड के नाम पर प्रतिमाह की जा रही धनराशि की कटौती पर रोक लगाने का फैसला किया था। फैसले में अदालत ने कहा कि पेंशन सेवानिवृत्त कर्मचारियों की व्यक्तिगत संपति है। सरकार उन पर यह कटौती जबरन लागू नहीं कर सकती। इस फैसले के बाद पैंसनर्स ने खुशी का इजहार किया था लेकिन अब एक बार फिर पेंशनर्स का गुस्सा उफान पर है।
देखें वीडियो: नौकरशाह कर रहे सरकार और न्यायालय को गुमराह, आखिर क्यों बोले पेंशनर्स ?
हल्द्वानी में अरुणोदय धर्मशाला में एकजुट हुए पेंशनर्स ने एक स्वर में कहा कि राज्य के नौकरशाह सरकार ही नहीं बल्कि माननीय न्यायालय को भी गुमराह करने का काम कर रहे हैं, जिसका विरोध किया जाएगा।
राजकीय पेंशनर्स संघर्ष समिति के संयोजक वीर सिंह ने कहा कि एक तरफ तो सरकार राज्य के सभी निवासियों को पांच लाख तक का स्वास्थ्य लाभ देने की बात कहती हैं वहीं अब पेशनर्स के सामने स्वास्थ्य लाभ लेने या न लेने की शर्त रखी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि नौकरशाह कहीं न कहीं सरकार और न्यायालय को गुमराह कर सेवानिवृत कर्मचारियों के हकों को हनन करने की कोशिश कर रहे हैं जिसका पूरजोर विरोध किया जाएगा। साथ ही इस मामले को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने भी रखा जाएगा।
बताते चलें कि राज्य सरकार ने स्वास्थ्य बीमा के नाम पर पेंशनर्स की अनुमति के बिना 21 दिसंबर 2020 को एक शासनादेश जारी कर एक जनवरी 2021 से उनकी पेंशन में से स्वास्थ्य बीमा के नाम पर धनराशि की अनिवार्य कटौती शुरू कर दी थी। गोल्डन कार्ड के नाम पर सेवानिवृत्त कर्मचारियों से ग्रेड-पे के अनुरूप कटौती हो रही थी। इससे 250 रुपये से लेकर 1200 रुपये तक हर माह स्वास्थ्य बीमा के नाम पर जाते थे। मामले में सुनवाई के बाद न्यायालय ने पेंशनर्श के हक में फैसला सुनाते हुए कटौती पर रोक लगा दी थी।
