उत्तराखंड: पांच हजार आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चे सीखेंगे स्थानीय बोली
हल्द्वानी,अमृत विचार। बच्चों को स्थानीय बोली की ओर आकर्षित करने के लिए शिक्षा विभाग तैयारियों में जुट गया है। राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा के तहत पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है। जिसे सबसे पहले राज्य के पांच हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले नन्हे बच्चों पर लागू किया जाएगा। पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों के …
हल्द्वानी,अमृत विचार। बच्चों को स्थानीय बोली की ओर आकर्षित करने के लिए शिक्षा विभाग तैयारियों में जुट गया है। राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा के तहत पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है। जिसे सबसे पहले राज्य के पांच हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले नन्हे बच्चों पर लागू किया जाएगा।
पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों के लिए आंगनबाड़ी ही सबसे पहले शिक्षा प्राप्त करने का जरिया हैं। ऐसे में शिक्षा विभाग की ओर से बच्चों को अपनी बोली को सीखने के लिये प्रेरित किया जाएगा। शिक्षा के स्तर को और बेहतर करने के लिये नई शिक्षा निति तैयार की जा रही है।
इसके तहत बनने वाले नये सिलेबस में स्थानीय बोली को भी शामिल किया जाएगा। आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले तीन साल से अधिक उम्र के बच्चों को तैयार किये गये पाठ्यक्रम के हिसाब से पढ़ाया जाएगा। इससे न केवल पर्वतीय क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर शिक्षा का विकल्प मिलेगा बल्कि वे राज्य के इतिहास से भी रूबरू होंगे और अपनी सांस्कृतिक धरोहर को समझ सकेंगे। इससे स्थानीय बोली का उत्थान भी होगा। यहीं नहीं शिक्षा विभाग अभिभावकों को भी बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों में भेजने के लिए प्रेरित करेगा।
बच्चों के लिए स्थानीय बोली सीखाना बहुत जरूरी है। साथ ही राज्य का इतिहास भी बच्चों को पता होना चाहिए। इसी उद्देश्य से यह नया पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है। छोटे बच्चों में इसे लागू करने का उद्देश्य यह है कि वे नई चीजें जल्दी सीखते हैं। – केएस रावत, मुख्य शिक्षा अधिकारी
