हल्द्वानी: सात माह बाद नहीं भरे आपदा के जख्म

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हल्द्वानी, अमृत विचार। कॉमन इंट्रो-अक्टूबर में भारी बारिश के चलते नैनीताल जिला आपदाग्रस्त हो गया था। हल्द्वानी और उसके आसपास भारी नुकसान हुआ। गौलापुल की एप्रोच रोड बह गई। नैनीताल से हल्द्वानी और नैनीताल से भवाली मार्ग कई जगह धंस गया। काठगोदाम रेलवे स्टेशन में एक पटरी गौला नदी में समा गई। गौलापार में सिंचाई …

हल्द्वानी, अमृत विचार। कॉमन इंट्रो-अक्टूबर में भारी बारिश के चलते नैनीताल जिला आपदाग्रस्त हो गया था। हल्द्वानी और उसके आसपास भारी नुकसान हुआ। गौलापुल की एप्रोच रोड बह गई। नैनीताल से हल्द्वानी और नैनीताल से भवाली मार्ग कई जगह धंस गया। काठगोदाम रेलवे स्टेशन में एक पटरी गौला नदी में समा गई। गौलापार में सिंचाई नहरें क्षतिग्रस्त हो गईं। आपदा बीत जाने के सात माह बाद भी अब तक व्यवस्थायें दुरुस्त नहीं हो पाई हैं। जबकि प्री मानसून की बारिश शुरू हो गई है। साथ ही मौसम विभाग ने राज्य में इस बार आठ से 10 जून के बीच मानसून आने का अनुमान जताया है। ऐसे में मानसूनी बारिश में एक बार फिर से व्यवस्थायें चरमरा जाने का खतरा है।

23 करोड़ खर्च करके बच पायेगा गौलापुल
हल्द्वानी। पिछले साल अक्टूबर की बारिश में गौला पुल की एप्रोच सड़क बह गई थी। इस वजह से पुल पर कई दिनों तक आवागमन बंद करा दिया गया था। इससे पहले एक बार गौला पुल नदी में आयी बाढ़ की वजह से टूट भी चुका है। गौलापार की आबादी को हल्द्वानी से जोड़ने के लिये इस पुल की सही सेहत रहना जरूरी है। गौलापुल के कमजोर होने का कारण यहां पुल के नीचे और आसपास किये जाने वाला खनन है। फिलहाल नदी में खनन नहीं रुकता देख एनएचएआई आईआईटी रुड़की के प्लान बी के तहत गौला पुल को बचाएगा। पुल को बचाने के लिए 23 करोड़ रुपया खर्च होगा। एनएचएआई इसके लिए बजट मुहैया कराएगी। लोक निर्माण विभाग इस काम की निर्माण एजेंसी होगी।

गौला पुल के लिये एनएचएआई ने लोनिवि से निर्माण एजेंसी के रूप में काम करने का प्रस्ताव दिया था। लोनिवि प्रस्ताव के तहत आईआईटी रुड़की के डिजाइन के हिसाब से डीपीआर बनाकर एनएचएआई को भेज दिया है।

– अशोक चौधरी, अधिशासी अभियंता, लोनिवि, हल्द्वानी

गौलापार के गांवों में सिंचाई के लिये संकट
हल्द्वानी। गौलापार को सिंचाई के लिये पानी की आपूर्ति करने वाली भूमिगत नहर आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त हो गई थी। नहर में पानी का बहाव बंद हो गया। इसके बाद स्थानीय लोगों ने इसे ठीक करने के लिये कई बार आंदोलन भी किया लेकिन विभाग ने इसे ठीक करने में असमर्थता जताई। बाद में स्थानीय लोगों ने खुद अपने खर्चे से नहर को कामचलाऊ स्थिति में ठीक किया। हालांकि तेज बहाव में यह नहर दोबारा क्षतिग्रस्त होने का डर है। यहां बड़ी आबादी सिंचाई के लिये इसी नहर पर निर्भर है। नहर में पानी नहीं आने की स्थिति में यहां फसलें उगाना मुश्किल हो जायेगा। इधर, सिंचाई विभाग का कहना है कि गौलापार में सिंचाई नहर को ठीक करने के लिये अभी बजट नहीं मिल पाया है। बजट मिलने के बाद ही इसे ठीक किया जायेगा।

गौलापार में सिंचाई नहर को ठीक करने का प्रस्ताव शासन में भेजा गया था। यह बजट अभी तक पास नहीं हो पाया है। बजट पास होने के साथ ही गौलापार की सिंचाई नहर को ठीक करने का काम शुरु कर दिया जायेगा।

– केएस बिष्ट, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग, हल्द्वानी

काठगोदाम रेलवे स्टेशन में पटरी का निर्माण
हल्द्वानी। आपदा के दौरान काठगोदाम रेलवे स्टेशन में एक पटरी गौला नदी में समा गई। यहां अब एक ही पटरी पर ट्रेनों का चलाया जा रहा है। कुछ दिनों तक ट्रेनें बाधित भी रहीं। हालांकि बाद में ट्रेनों का संचालन शुरु कर दिया गया। काठगोदाम रेलवे स्टेशन से मुंबई, दिल्ली, लखनऊ, हावड़ा, देहरादून, कानपुर, जम्मू शहरों के लिये ट्रेनें चलतीं हैं। केवल एक ही पटरी पर ट्रेनों का संचालन निर्भर होना यात्रियों के लिये दुविधा खड़ा कर सकता है। वो भी तब जब अकेली बची पटरी भी खतरे की जद में हो। फिलहाल रेलवे से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मामला ऊपर अधिकारियों के पास पहुंच गया है। अब कार्यवाही वहीं से हो सकती है।

काठगोदाम रेलवे स्टेशन में गौला नदी में गिरी पटरी की जगह दूसरी पटरी बनाने के लिये वन विभाग से स्वीकृति मिलना जरूरी है। वन विभाग से स्वीकृति मिलने के बाद ही यहां काम शुरू हो सकता है।

– राजेंद्र सिंह, पीआरओ, पूर्वोत्तर रेलवे मंडल, बरेली

मार्ग पर दौड़ रहे वाहन
हल्द्वानी। आपदा के दौरान हल्द्वानी से नैनीताल राजमार्ग कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गया था। सड़क में कई जगह दरारें आ गईं। वहीं, दूसरी ओर नैनीताल से भवाली के लिये सड़क भी कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई थी। यहां अब भी खतरा का भय बना हुआ है। जबकि कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी तक पहुंचने के लिये पहाड़ से आने के लिये यह महत्तवपूर्ण सड़कें हैं। यहां से रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं। अगर यही हाल बने रहे तो मानसून की शुरूआती बारिश में ही यहां फिर से बड़ी आपदा आ सकती है। इसके बाद जनजीवन फिर से अस्तव्यस्त हो सकता है। सरकार ने कई घोषणाएं की लेकिन वह घोषणाएं पूरी नहीं हो पाईं।

नैनीताल-भवाली रोड की मरम्मत के लिये शासन को प्रस्ताव भेजा गया था लेकिन बजट स्वीकृत नहीं हो पाया है। बजट स्वीकृत होने के बाद यहां मरम्मत का काम शुरू हो पायेगा।

– दीपक गुप्ता, अधिशासी अभियंता, लोनिवि, नैनीताल

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