सीतापुर: ‘हांफती सड़कों पर खतरा-ए-जान’, ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर थम नहीं रही हादसों की रफ्तार
सीतापुर। जिले की मुख्य सड़कें ही नहीं सम्पर्क मार्ग बिन मौसम पहली बारिश के बाद हांफते नजर आ रहे हैं। ऐसे में लोगों की जान का जोखिम बढ़ चला है। हालांकि यातायात नियमों की घुट्टी पुलिस की ओर जारी है लेकिन तेज रफ्तार के बीच ऊबड़-खाबड़ रास्तों में हादसों की रफ्तार थमने का नाम नहीं …
सीतापुर। जिले की मुख्य सड़कें ही नहीं सम्पर्क मार्ग बिन मौसम पहली बारिश के बाद हांफते नजर आ रहे हैं। ऐसे में लोगों की जान का जोखिम बढ़ चला है। हालांकि यातायात नियमों की घुट्टी पुलिस की ओर जारी है लेकिन तेज रफ्तार के बीच ऊबड़-खाबड़ रास्तों में हादसों की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही।
ताजा आंकड़ों पर गौर करें तो लखनऊ परिक्षेत्र के सीतापुर जनपद में इन छः माह के भीतर प्रमुख सड़कों पर 150 लोगों की सड़क हादसे में मौत हो चुकी है। घायलों की संख्या तीन सैकड़ा का आंकड़ा पार कर रही है। कुछ ऐसे भी हैं जो जिंदगी पाने के लिए अस्पतालों में संघर्ष कर रहे हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सुनील कुमार कहते हैं कि जिले की सड़कें टिकाऊ माल के जरिये नहीं बनती हैं, चूंकि जनपद लखनऊ-दिल्ली मार्ग पर बसा है और तमाम से कारोबार भी प्रमुख शहरों से जुड़े हैं, ऐसे में भारी वाहनों की आवाजाहीं से सड़के और गिट्टियां उखड़ जाती है। खराब सड़क और तेज रफ्तार वाहन ही कहीं न कहीं दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बन रहे हैं।
एएसआई रामजतन बताते हैं कि समय-समय पर यातायात अभियान चलाया जाता है, जिनमें चालानी कार्रवाई के अलावा नियमों की जानकारी भी दी जाती है लेकिन हादसों की दर को काफी हद तक थामा नहीं जा सका है, हादसों का बड़ा कारण यातायात नियमों की अनदेखी है।
’पहली बारिश में खुली पोल’
जिले में पहली बारिश में शहर की सड़कों की पोल खुल गई। नेपालापुर से पुलिस लाइन चौराहा और बस अड्डे तक जाने वाले मार्ग पर 37 बड़े गड्ढे और दर्जन छोटे-छोटे गड्ढे हैं। गुरुवार सुबह सवारी लेकर आ रहा ई रिक्शा अचानक अनियंत्रित होकर पलट गया। किसी तरह यात्रियों की जान बची।
’चार वर्षों में सड़क हादसों की दर’
सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2018 में 300 सड़क हादसे हुए। इनमें मरने वालों की संख्या 150 से अधिक थी। वर्ष 2019 में ये आंकड़ा 304 को पार कर गया। इस वर्ष मरने वालों की संख्या 200 रही। 2020 में 231 हादसे हुए। इसमें 130 लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा। 2021 में 230 हादसे हुए, जिसमें 126 से अधिक लोगों की मौत हुई। इन छह माह के भीतर मौत का आंकड़ा 132 को पार कर चुका है।
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