हल्द्वानी: शहीदों के ‘सरताज’ वीर योद्धा श्रीगुरु अर्जुन देव जी के शहीदी दिवस पर गुरुवाणी से संगत हुई निहाल
हल्द्वानी, अमृत विचार। शहीदों के सरताज साहिब श्री गुरु अर्जुन देव जी का शहीदी पर्व आज गुरद्वारा सिंह सभा में सादगी के साथ मनाया गया। धार्मिक दीवान की शुरुआत सुबह 10 बजे हजूरी रागी भाई नाजर सिंह और साथियों ने कीर्तन से की। किच्छा से आए भाई गुरदेव सिंह ने कीर्तन की हाजिरी भरी। भाई …
हल्द्वानी, अमृत विचार। शहीदों के सरताज साहिब श्री गुरु अर्जुन देव जी का शहीदी पर्व आज गुरद्वारा सिंह सभा में सादगी के साथ मनाया गया। धार्मिक दीवान की शुरुआत सुबह 10 बजे हजूरी रागी भाई नाजर सिंह और साथियों ने कीर्तन से की। किच्छा से आए भाई गुरदेव सिंह ने कीर्तन की हाजिरी भरी। भाई गुरदेव सिंह एवं साथियों ने रसभिना कीर्तन कलजुग जहाज अरजन गुरु और जपयो जिन अरजन देव गुरु प्रस्तुत किए।

लुधियाना से आए प्रचारक भाई बलदेव सिंह जी ने गुरु साहिब के जीवन से जुड़ी शिक्षाओं के बारे में संगत को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि गुरु साहिब ने गुरु ग्रंथ साहिब की संपादना कर के संसार को ऐसे ज्ञान का खजाना दे दिया जिसे ग्रहण कर के कोई भी मनुष्य उस प्रभु को सहज रूप में पा सकता है। इसके बाद मुख्य ग्रंथी अमरीक सिंह जी ने अरदास, हुकमनामा लिया। इस दौरान समूह संगत ने गुरु का लंगर छका। इस बीच छबील मीठी लस्सी का लंगर चलता रहा।

बताते चलें कि गुरु अर्जुन देव जी सिखों के पांचवें गुरु और सिख धर्म के पहले शहीद हुए हैं। इन्हें शहीदों का सरताज कहा जाता है। इनकी शहीदी के बाद इनके सुपुत्र गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने शांति के साथ-साथ सैनिक बनने का भी उपदेश दिया। श्री गुरु अर्जुन देव जी का प्रकाश श्री गुरु रामदास जी के गृह में माता भानी जी की कोख से वैशाख वदी 7 सम्वत, 1620 को गोइंदवाल साहिब में हुआ। इनका पालन-पोषण गुरु अमरदास जी जैसे गुरु तथा बाबा बुड्ढा जी जैसे महापुरुषों की देखरेख में हुआ।

गुरु जी के शहीदी दिवस पर जगह-जगह ठंडे-मीठे पानी का शरबत लोगों को पिलाया जाता है। यह इस बात का प्रतीक है कि कोई भी व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को कभी भी प्यासा न रखे और उसे यातनाएं न दे। कार्यक्रम में मुख्य सेवादार रंजीत सिंह, अमरजीत सिंघ, जगजीत सिंह, जसवंत सिंह, रविंदरपाल सिंह, तजिंदर सिंह समेत सेवादार मौजूद रहे।
