विश्व पर्यावरण दिवस 2022 : भाषणों में नहीं आचरण में उतारना होगा प्रकृति प्रेम तभी हो सकेगा पर्यावरण का संरक्षण
संजय पाठक, हल्द्वानी। आज समूचा विश्व पर्यावरण के प्रति अपनी चिंता को जाहिर कर रहा है। करे भी क्यों न आखिर पर्यावरण तो हम सबका है। हमारे देश में भी कई वर्षों से विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शहर-शहर , गांव-गांव गोष्ठियों और पौधरोपण के कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल …
संजय पाठक, हल्द्वानी। आज समूचा विश्व पर्यावरण के प्रति अपनी चिंता को जाहिर कर रहा है। करे भी क्यों न आखिर पर्यावरण तो हम सबका है। हमारे देश में भी कई वर्षों से विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शहर-शहर , गांव-गांव गोष्ठियों और पौधरोपण के कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं।

ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर अब तक देश में पर्यावरण संरक्षण की तस्वीर में आशा के अनुरूप सुधार क्यों नहीं आ सका? आखिर क्यों जल, जंगल, जमीन की तस्वीर बीते वर्षों में सुधर नहीं सकी? आखिर क्यों जंगल धधक रहे हैं? शहर-शहर कचरे के अंबार क्यों लगे हैं? नदियां क्यों मैली हो रही हैं? हवा क्यों जहरीली बन गई है?
पर्यावरण दिवस के नाम पर महज खानापूर्ति पर सवाल उठाते हुए इंदिरा प्रियदर्शिनी राजकीय महिला महाविद्यालय में वनस्पति विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. एसडी तिवारी ने पर्यावरण दिवस को आचरण दिवस के तौर पर मनाने का आह्वान किया है।
उन्होंने कहा कि आज समूचा विश्व पर्यावरण को लेकर चिंतित है और पर्यावरण को सुधारने को लेकर कार्यक्रमों का आयोजन भी कर रहा है। गोष्ठियों में पर्यावरण को बचाने के लिए पेड़ लगाओ की बातें हो रही हैं। लेकिन अगर हम भारतवासी स्वआचरण पर्यावरण संरक्षण दिवस मनाते या यूं कहें कि आज के दिवस को आचरण दिवस के रूप में मनाते तो ज्यादा बेहतर होता। पर्यावरण के साथ आज जो अत्याचार हो रहा है वह असहनीय है। किसी के पास भी ऐसी जादू की छड़ी नहीं है कि पर्यावरण के प्रति बड़ी बड़ी बातें कहने से पर्यावरण में सुधार आ जाए। अगर ऐसा होता तो कई सालों से हम ऐसा ही कर रहे हैं अब तक पर्यावरण सुधर चुका होता। आज प्राणवायु ऑक्सीजन के लाले पड़ गए। शुद्ध जल मिलना मुश्किल हो गया।
सुनिए पर्यावरणविद प्रो. डॉ. एसडी तिवारी की बात, पर्यावरण दिवस के नाम पर चल रहे खेल की पोल खोल कर रख दी Exclusive Audio
आज हम मजदूर को पेड़ रोपने के गड्डा खोदने के निर्देश देंगे। माली हमारे घर आंगने को फूलों से महकाएगा। स्वच्छक हमारे गली मोहल्ले और शहर को स्वच्छ बनाएगा… इन सभी पर्यावरण मित्रों को धन्यवाद है। लेकिन पर्यावरण संरक्षण के प्रति हम क्या कर रहे हैं, क्या हम अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं? यह चिंतनीय विषय है।
हम खुद को बड़े पर्यावरणवादी मानते हैं लेकिन कूड़ा जहां फेंकने का मन करे वहीं फेंकते हैं, नालियों को कूड़े से भरते हैं, प्लास्टिक की थैलियों का उपयोग करते हैं। तो क्या ऐसे में पर्यावरण सुधरेगा, यह बड़ा सवाल है? हमारे देश को सोने की चिड़िया कहा गया था, वह आज भी है लेकिन जिस तरह से हम पर्यावरण का विध्वंस कर रहे हैं वह चिंताजनक है। अगर समय रहते नहीं चेते तो आने वाले दिनों में पर्यावरण के हालात बिगड़ने में देर नहीं लगेगी।
एक संकल्प लें कि अपनी ओर से पर्यावरण को संरक्षित करें। न केवल नए पौधे लगाएं बल्कि पुराने पेड़ों के संरक्षण का भी प्रयास करें। जलस्त्रोतों को संरक्षित करने में आगे आएं। विदेशों में आप देखेंगे कि सड़क के दोनों ओर हरियाली नजर आती है लेकिन अपने देश में सड़क के दोनों ओर पॉलीथिन उड़ते नजर आ जाएगी। सड़क पर दौड़ती कार के शीशे से चिप्स के रैपर, पॉलीथिन फेंकने वाले लोग भी हम ही हैं। वन्यजीवों के प्रति भी हमारे कान बंद हो गए हैं। चिड़िया पानी के बगैर तड़प रही हैं। पर्यावरण में पेड़ लगाने के साथ-साथ पारिस्थिति तंत्र को सुरक्षित रखने के लिए आगे आएं। घर के बाहर चिड़ियों के लिए पानी रखें। यह कितना बड़ा दुर्भाग्य है कि गोवंश पानी के लिए तड़प रहे हैं, अगर हम उन्हें पानी पिला लें तो यह भी पर्यावरण के प्रति हमारा योगदान होगा।
यह भी देखें: हे भगवान! जीवनदायिनी नहर को बना दिया कूड़ाघर
डॉ. एसडी तिवारी ने कहा कि जब भी कोई सड़क पर कूड़ा फेंके तो हमारे अंदर इतना नैतिक साहस होना चाहिए कि हम उस व्यक्ति से कहें कि आप जो कर रहे हैं वह ठीक नहीं है। कूड़े को उसकी निर्धारित जगह में डालें, ये सड़क, ये नाली और ये जंगल कूड़ा फेंकने के ठिकाने नहीं बल्कि हमारे जीवन को बेहतर बनाने के लिए हैं। यकीन मानिए अगर आप ऐसा करते हैं तो यह भी पर्यावरण के प्रति आपकी सेवा ही होगी।
