नैनीताल: हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड में लिए अतिक्रमण संबंधी दस्तावेज

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नैनीताल, अमृत विचार। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हल्द्वानी में रेलवे की 29 एकड़ भूमि पर किए गए अतिक्रमण के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता हल्द्वानी निवासी रवि शंकर जोशी की तरफ से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। न्यायालय ने रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में अतिक्रमणकारियों को सुनते हुए उनके दस्तावेजों को रिकॉर्ड में ले लिया है। न्यायालय …

नैनीताल, अमृत विचार। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हल्द्वानी में रेलवे की 29 एकड़ भूमि पर किए गए अतिक्रमण के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता हल्द्वानी निवासी रवि शंकर जोशी की तरफ से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।

न्यायालय ने रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में अतिक्रमणकारियों को सुनते हुए उनके दस्तावेजों को रिकॉर्ड में ले लिया है। न्यायालय ने कहा है कि याचिका निस्तारित होने तक उन्हें अवश्य सुना जाएगा। न्यायालय ने अगली सुनवाई के लिए कोई तिथि नियत नहीं की, जिस कारण अब अगली सुनवाई याचिका के क्रमवार आने के बाद संभव होगी। पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा था जो लोग इससे प्रभावित हैं, वे दो सप्ताह के भीतर अपना पक्ष समस्त कागजातों के साथ न्यायालय में पेश कर सकते हैं।

मामले के अनुसार, 9 नवंबर 2016 को हाईकोर्ट ने रविशंकर जोशी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए 10 सप्ताह के भीतर रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि जितने भी अतिक्रमणकारी हैं, उनको रेलवे पीपीएक्ट के तहत नोटिस देकर जनसुनवाई करे। रेलवे की तरफ से कहा गया था कि हल्द्वानी में रेलवे की 29 एकड़ भूमि पर अतिक्रमण किया गया है जिस पर करीब 4365 लोग मौजूद हैं। हाईकोर्ट के आदेश पर इन लोगों को पीपी एक्ट में नोटिस दिया गया, जिनकी रेलवे ने पूरी सुनवाई कर ली है। किसी भी व्यक्ति के पास जमीन के वैध कागजात नहीं पाए गए।

इनको हटाने के लिए रेलवे ने जिला अधिकारी नैनीताल से दो बार सुरक्षा दिलाए जाने हेतु पत्र दिया गया। जिस पर कोई प्रतिउत्तर नहीं दिया गया। जबकि दिसंबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यो को दिशा निर्देश दिए थे कि अगर रेलवे की भूमि पर अतिक्रमण किया गया है तो पटरी के आसपास रहने वाले लोगों को दो सप्ताह और उसके बाहर रहने वाले लोगों को 6 सप्ताह के भीतर नोटिस देकर हटाएं ताकि रेवले का विस्तार हो सके। इन लोगों को राज्य में कहीं भी बसाने की जिमेदारी जिला प्रशासन एवं राज्य सरकारों की होगी। अगर इनके सभी पेपर वैध पाए जाते हैं तो राज्य सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत इनको आवास मुहैया कराए।

 

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