बरेली: आला हजरत के मदरसे से अमन की खुशबू बिखेरने की शुरुआत

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अमृत विचार, बरेली। देश और प्रदेश में बिगड़ती फिजा में अमन की खुशबू बिखेरने की शुरुआत इस बार मदरसों से की गई है। मदरसों में छात्रों को भारतीय संस्कृति की विविधता और राष्ट्रवाद की शिक्षा दी जा रही है। बुधवार को सौदागरान स्थित आला हजरत द्वारा स्थापित मदरसा मंजर-ए-इस्लाम के छात्रावास में कार्यक्रम का आयोजन …

अमृत विचार, बरेली। देश और प्रदेश में बिगड़ती फिजा में अमन की खुशबू बिखेरने की शुरुआत इस बार मदरसों से की गई है। मदरसों में छात्रों को भारतीय संस्कृति की विविधता और राष्ट्रवाद की शिक्षा दी जा रही है। बुधवार को सौदागरान स्थित आला हजरत द्वारा स्थापित मदरसा मंजर-ए-इस्लाम के छात्रावास में कार्यक्रम का आयोजन दरगाह प्रमुख सुब्हानी मियां की सरपरस्ती और सज्जादानशीन मुफ्ती अहसमन मियां की अध्यक्षता में किया गया।

दरगाह के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि इस कार्यक्रम में मदरसे के वरिष्ठ शिक्षक मुफ्ती मोहम्मद सलीम बरेलवी ने कहा कि दुनिया में भारत ही एक मात्र ऐसा देश है जहां की मिट्टी में विभिन्न संस्कृतियों, धर्मों, भाषाओं और अनेक रंग और नस्ल के लोग रचे बसे हुए हैं। जहां से हर धर्म और विचार की खुशबू आती है। इन्हीं फूलों से मिलकर हमारा देश विश्व के नक्शे पर जगमगा रहा है। यह भारत देश तो इतना उपकारी है कि इसने हर जमाने में अपने मूल निवासियों के अलावा दूसरे देशों से आने वालों को जगह दी। यहां के लोग सदैव मिलजुल कर आपसी सौहार्द के साथ रहते चले आ रहे हैं।

विविधता के बावजूद राष्ट्रवाद के बिंदु पर यहां के सभी नागरिक हमेशा एकजुट रहे। जब भी देश पर कोई संकट आया तब सभी धर्मों के मानने वालों ने इस देश की सुरक्षा के लिए कंधे से कंधा मिलाकर संकट का सामना किया है। नफरत और भेदभाव के माहौल को हमेशा यहां के भाईचारे ने अस्वीकार किया है। हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, पारसी, बौद्ध, जैन आदि ने हमेशा एक दूसरे का सहयोग किया है।

एक दूसरे के धार्मिक स्थलों का निर्माण कराया है। दशकों पूर्व हिन्दुओं, सिखों आदि ने मुस्लिम समुदाय के धर्मस्थलों की सुरक्षा भी की और निर्माण भी कराया। इतना ही नहीं, धर्म स्थल बनाने के लिए भूमि दान की। इसी तरह मुस्लिम शासकों ने भी सभी धर्मों के लिए धार्मिक स्थलों का निर्माण कराया। इतिहास ऐसे उदाहरणों से भरा पड़ा है। आज इसी भारत की हम सबको आवश्यकता है।

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