निजी अस्पतालों में नहीं शुरू हुई बूस्टर डोज की सुविधा, टीका लगवाने को भटक रहे लोग

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अमृत विचार, अयोध्या। जनपद में एक बार फिर से कोरोना अपने पांव पसारने लगा है। सोमवार को ही कोरोना से 8 और मरीज संक्रमित हुए हैं, लेकिन जनपद में बूस्टर डोज का कुछ अता-पता नहीं है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने तीसरा टीका (बूस्टर डोज) लगाने के लिए निजी अस्पतालों को निर्देश दिए थे, लेकिन अभी किसी …

अमृत विचार, अयोध्या। जनपद में एक बार फिर से कोरोना अपने पांव पसारने लगा है। सोमवार को ही कोरोना से 8 और मरीज संक्रमित हुए हैं, लेकिन जनपद में बूस्टर डोज का कुछ अता-पता नहीं है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने तीसरा टीका (बूस्टर डोज) लगाने के लिए निजी अस्पतालों को निर्देश दिए थे, लेकिन अभी किसी भी निजी अस्पताल में यह सेवा शुरू नहीं हुई है। नतीजतन लोगों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।

कोरोना की चौथी लहर के आने के भी कयास लगाए जा रहे हैं , जिसे देखते हुए सरकार ने बूस्टर डोज लगाने के लिए निजी अस्पतालों को अनुमति दी थी। इसमें 59 वर्ष तक की आयु वर्ग के लोगों को निजी अस्पतालों से बूस्टर डोज लगवाने का निर्देश दिया गया था, लेकिन जिले के निजी अस्पतालों में बूस्टर डोज का वैक्सीनेशन नहीं शुरू हो सका है, क्योंकि उनके पास वैक्सीन ही नहीं है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से अप्रैल माह में एक फरमान जारी किया गया था कि अब 18 से 59 वर्ष आयु वर्ग के लोग जिले के किसी भी निजी अस्पताल में जाकर बूस्टर डोज लगवा सकते हैं। हालांकि इसके लिए उन्हें शुल्क देना होगा। निजी अस्पतालों में 250 रुपए शुल्क देकर बूस्टर डोज लगवाना होगा। बाद में बूस्टर डोज की कीमत बढ़ा दी गई। इस समय 387 रुपए में बूस्टर डोज लगाए जाने के निर्देश हैं। इसके इतर 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों को सरकारी अस्पतालों में बूस्टर डोज निशुल्क लगाया जाएगा। मंत्रालय के निर्देश जारी होने के बाद जनपद के पांच निजी अस्पतालों को वैक्सीनेशन का दायित्व मिला था, लेकिन अभी कहीं भी बूस्टर डोज की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है।

निजी अस्पतालों को सता रहा भय
दरअसल वैक्सीन की एक वायल में दस लोगों को टीका लगाया जाता है। वायल खुलने के चार घंटे में सभी खुराक लगनी होती है, लेकिन कई बार पर्याप्त संख्या में मरीज न पहुंचने के कारण वैक्सीन के खराब होने का खतरा बना रहता है। इसी कारण निजी चिकित्सालय वैक्सीन खरीदने व इस सुविधा को शुरू करने में कतरा रहे हैं।

प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीन बनाने वाली कम्पनी से सप्लाई होनी है। वैक्सीन मैनेजर को भी निर्देशित किया गया है कि वैक्सीन मंगवाने में निजी अस्पतालों की समस्या को दूर किया जाए।
– डॉ. आरके देव, जिला नोडल अधिकारी, कोरोना वैक्सीनेशन

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