बाराबंकी: शुरू हुई अगेती धान की रोपाई, जुलाई का पहला पखवारा होता है सबसे अनुकूल

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हैदरगढ़/बाराबंकी। जिले में पहली बारिश के बाद धान की रोपाई शुरू हो गई है। धान की अगेती खेती करने वाले जून के अंतिम सप्ताह को सबसे अनुकूल समय मान रहे हैं। हालांकि जुलाई का प्रथम सप्ताह से आमतौर पर रोपाई प्रारंभ होती है। हैदरगढ़ के हरिपालपुर गांव निवासी पूर्व सेवानिवृत्त राजकीय इंटर कॉलेज पोखरा के …

हैदरगढ़/बाराबंकी। जिले में पहली बारिश के बाद धान की रोपाई शुरू हो गई है। धान की अगेती खेती करने वाले जून के अंतिम सप्ताह को सबसे अनुकूल समय मान रहे हैं। हालांकि जुलाई का प्रथम सप्ताह से आमतौर पर रोपाई प्रारंभ होती है। हैदरगढ़ के हरिपालपुर गांव निवासी पूर्व सेवानिवृत्त राजकीय इंटर कॉलेज पोखरा के प्रधानाचार्य सीता नाथ मिश्रा ने शुक्रवार को अपने खेतों में धान की रोपाई शुरू करवाई। उनका खेत पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के बगल स्थित है।

जिला कृषि अधिकारी संजीव कुमार बताते हैं कि जुलाई का महीना खेती के लिहाज से अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। अगेती खेती करने वाले लोग कि जून के माह में धान की रोपाई करते हैं। क्योंकि एक बारिश हो चुकी है और जल्द ही मानसून दस्तक देने वाला है। स्थिति में अधिकांश किसान धान की रोपाई की तैयारी कर रहे हैं। धान की रोपाई की तैयारी के लिए यह मौसम सबसे अनुकूल है।

जिला कृषि अधिकारी बताते हैं कि धान की खेती के लिए अच्छी जलधारण क्षमता वाली चिकनी, मटियार या मटियार दोमट मृदा सर्वोत्तम मानी जाती हैं। रेतीली अथवा रेतीली-दोमट मृदा धान के लिए उपयुक्त नहीं होती है। क्योंकि इनसे जल का रिसाव अपेक्षाकृत अधिक होता है। सिंचाई की समुचित व्यवस्था तथा सही प्रबधंन से अधिकतर मृदाओं में धान की अच्छी पैदावार ली जा सकती है।

उन्होंने किसानों को सलाह दी कि गर्मी की जुताई के बाद 2-3 जुताई करके खेत की तैयारी करनी चाहिए। धान की रोपाई के लिए एक सप्ताह पूर्व खेत की सिंचाई कर दें। रोपाई से पहले 2-3 जुताई हैरो से करके तथा बाद में पानी भर कर खेत में पडलर एवं टिलर से जुताई करके व पाटा लगा कर मिट्‌टी को लेहयुक्त एवं समतल बना दें। 20-25 कि.ग्रा. ट्राइकोडर्मा को 60 कि.ग्रा. गोबर की सड़ी खाद या वर्मीकम्पोस्ट में मिलाकर हल्के पानी का छींटा देकर एक सप्ताह तक छाया में सुखाने के बाद खेत में एक समान छिड़काव कर दें, जिससे मृदाजनित रोगों में कमी आयेगी।

जिला कृषि अधिकारी बताते हैं कि धान की रोपाई तभी करनी चाहिए जब पौध 20-25 दिनों पुरानी हो जाए तथा उसमें 4-5 पत्तियां निकल आएं तो यह रोपाई के लिए उपयुक्त होती है। यदि पौध की उम्र ज्यादा होगी तो रोपाई के बाद कल्ले कम फूटते हैं और उपज में कमी आती है। मध्यम व देर से पकने वाली प्रजातियों की रोपाई जुलाई माह के प्रथम पखवाड़े तक पूरी कर लेनी चाहिए। धान की शीघ्र पकने वाली प्रजातियों की रोपाई जुलाई के दूसरे पखवाड़े तक की जा सकती है। सुगन्धित प्रजातियों की रोपाई जुलाई महीने के अंत में किया जाना अच्छा माना जाता है।

उन्होंने कहा कि किसानों को चाहिए कि यदि वे नियमित रूप से प्रत्येक वर्ष धान की रोपाई करते हैं तो उन्हें  हरी खाद या 100-120 क्विंटल प्रति हेक्टेअर गोबर की सड़ी खाद का प्रयोग जरूर करें। पौध को उखाड़ने के पहले दिन क्यारियों की अच्छी तरह सिंचाई करके पौध रोपण वाले दिन सुबह नर्सरी से कमजोर, रोगमुक्त तथा अन्य किस्मों की नवपौधों को अलग कर देना चाहिए। प्रयास करना चाहिए कि एक जगह पर दो से 3 पौधे ही लगाएं। 3 सेंटीमीटर तक की गहराई में धान की रोपाई अच्छी मानी जाती है।

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