मुरादाबाद : कानूनी दांवपेच में फंसी फौजी की नाबालिग बेटी की तमन्ना

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

मुरादाबाद,अमृत विचार। वर्षों बाद नाबालिग बेटी को गले लगाने की तमन्ना कानूनी दांवपेच में उलझ गई है। मुरादाबाद कि जिस पुलिस के कंधे पर नाबालिग को सीडब्ल्यूसी के समक्ष पेश करने का भार था, वह दायित्व से विमुख होकर कार्रवाई की गैर अमरोहा पुलिस के पाले में डाल कर बैठ गई है। पुलिस के चौंकाने …

मुरादाबाद,अमृत विचार। वर्षों बाद नाबालिग बेटी को गले लगाने की तमन्ना कानूनी दांवपेच में उलझ गई है। मुरादाबाद कि जिस पुलिस के कंधे पर नाबालिग को सीडब्ल्यूसी के समक्ष पेश करने का भार था, वह दायित्व से विमुख होकर कार्रवाई की गैर अमरोहा पुलिस के पाले में डाल कर बैठ गई है। पुलिस के चौंकाने वाले खेल से हतप्रभ बाल कल्याण समिति ने अब विधिक राय लेने का मन बनाया है। बाल कल्याण समिति प्रकरण में मुकदमा दर्ज कराने पर मंथन कर रही है।

मझोला के रहने वाले एक फौजी की पत्नी एक पखवारे पहले सीडब्ल्यूसी के समक्ष बताया कि उसकी नाबालिग बेटी अमरोहा के गजरौला में बड़ी बहन के कब्जे में है। महिला ने बेटी की असल पहचान बदल देने का आरोप भी बड़ी बहन वह उसके पति पर लगाया। प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए सीडब्ल्यूसी ने आरोपी दंपति को नोटिस जारी किया। पाली बेटी के साथ मैप पीठ के समक्ष पेश होने का आदेश दिया। बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश होने की वजह से आरोपी दंपति खेल में उलझ गए।

पूरा दिन न्याय पीठ करती रही नाबालिग का इंतजार
सीडब्ल्यूसी अमरोहा के एक सदस्य की सांठगांठ से फौजी की बेटी को हथियाने का खेल उन्होंने शुरू कर दिया। अमरोहा सीडब्ल्यूसी के खेल का पता चलते ही बाल अधिकार आयोग की सदस्य सुचिता चतुर्वेदी बिफर पड़ी। उन्होंने जिलाधिकारी अमरोहा को पत्र लिखकर फौजी की बेटी को मुरादाबाद बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश करने का अनुरोध किया। जेजे एक्ट का खुला उल्लंघन करने की आरोपी अमरोहा बाल कल्याण समिति को भंग करने की भी संस्कृति महिला सदस्य ने की। इस बीच मुरादाबाद की बाल कल्याण समिति में नाबालिग को मारपीट के समक्ष पेश करने की तीसरी तिथि 25 जून तय की। शनिवार को पूरे दिन न्याय पीठ नाबालिग का इंतजार करती रही। समिति के सदस्य हरिमोहन गुप्ता ने बताया कि फौजी की बेटी शनिवार को भी आरोपी दंपति ने पेश नहीं की। हालांकि नाबालिग को पेश करने की जिम्मेदारी मझोला पुलिस की थी। पुलिस ने भी दायित्व से पल्ला झाड़ लिया। प्रकरण में अमरोहा के दंपति की भूमिका घोर संदिग्ध है। सीधे तौर पर उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने के प्रयास में सीडब्ल्यूसी विधिक राय लेने की तैयारी कर रही है। फौजी की मदद करने के लिए पुलिस के उच्चाधिकारियों से भी सीडब्ल्यूसी के सदस्य निरंतर संपर्क बनाए हुए हैं।

प्रकरण में अमरोहा पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण है। अमरोहा पुलिस संपर्क में है। अपराध चूंकि अमरोहा में हुआ है, ऐसे में अमरोहा पुलिस का दायित्व है कि वह फौजी की नाबालिग बेटी को सीडब्ल्यूसी के समक्ष पेश करे। रही बात मुकदमे की तो यदि सीडब्ल्यूसी ने तहरीर दी, तो मुकदमा दर्ज कर पुलिस आरोपों की जांच करेगी। आशुतोष तिवारी, सीओ, सिविल लाइंस मुरादाबाद

ये भी पढ़ें : मुरादाबाद : स्मार्ट सिटी मिशन के सात वर्ष पूरे, नागरिकों को दी परियोजनाओं की जानकारी

संबंधित समाचार