बरेली: किसानों की सुगमता के लिए तैयार किए 16 एप

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आइवीआरआई) के एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी इन्फार्मेशन सेंटर के वैज्ञानिकों की ओर से किसानों और पशु पालकों को जागरूक करने व जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से करीब 16 मोबाइल एप तैयार किए गए हैं। इन मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए किसानों को पशुओं में परजीवी नियंत्रण, प्रजनन, डेयरी मैनेजमेंट, …

बरेली, अमृत विचार। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आइवीआरआई) के एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी इन्फार्मेशन सेंटर के वैज्ञानिकों की ओर से किसानों और पशु पालकों को जागरूक करने व जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से करीब 16 मोबाइल एप तैयार किए गए हैं। इन मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए किसानों को पशुओं में परजीवी नियंत्रण, प्रजनन, डेयरी मैनेजमेंट, कृत्रिम गर्भाधान, शूकर पालन आदि से जुड़ी जानकारी मिल रही हैं। किसानों की ओर से दिए जा रहे सुझावों के आधार पर मोबाइल एप्लीकेशन को अपडेट भी किया जा रहा है।

वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य व कम समय में अधिक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए आर्गेनिक लाइवस्टॉक फार्मिंग, लैंडली पिग एप, शूकर पालन एप , पशु प्रजनन एप, आर्टिफिशियल इंसेमीनेशन (कृत्रिम गर्भाधान एप) और डेयरी मैनेजर एप शामिल हैं। इसमें शूकर पालन, पशु प्रजनन, कृत्रिम गर्भाधान और पशुओं में परजीवी नियंत्रण के एप हिंदी में हैं। बाकी अंग्रेजी में हैं। इसके साथ ही पशुओं के टीकाकरण को लेकर कौन सी वैक्सीन कहां उपलब्ध होगी आदि जानकारी को एप्लीकेशन में साझा किया गया है।

पशु प्रजनन एप आठ भाषाओं में
पशु प्रजनन एप अंग्रेजी, हिंदी, पंजाबी, असमिया, बांग्ला, गुजराती, तमिल और मलयालम भाषाओं में तैयार किया गया है। इस एप को पूरे देश को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। आईवीआरआई इसे अन्य स्थानीय भाषाओं में भी बनाने जा रहा है। दूसरे मोबाइल एप्लीकेशन को भी अन्य भाषाओं में लांच किए जाने की तैयारी की जा रही है।

तकनीक के जरिये की जा रही किसानों की मदद
एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी इन्फार्मेंशन सेंटर प्रभारी डा. रूपसी तिवारी ने बताया कि किसानों तक सीधी पहुंच के लिए तकनीक की मदद ली जा रही है। हर हाथ में मोबाइल है। इंटरनेट की कोई समस्या नहीं है। ऐसे में किसानों को मोबाइल एप मददगार साबित होंगे। अभी कई और मोबाइल एप्लीकेशन पर काम चल रहा है, जिसका लाभ किसानों को मिलेगा।

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