हल्द्वानी: एसटीएच को दिल के डॉक्टर का इंतजार
हल्द्वानी, अमृत विचार। कुमाऊं के सबसे बड़े सुशीला तिवारी राजकीय अस्पताल में पिछले 14 सालों से दिल के डॉक्टर की तैनाती नहीं हो पाई है। इसकी वजह से यहां पर दिल का उपचार करवाने के लिए आने मरीजों को निजी अस्पतालों में उपचार करवाना पड़ रहा है। अस्पताल में जहां हृदय चिकित्सक के पद पर …
हल्द्वानी, अमृत विचार। कुमाऊं के सबसे बड़े सुशीला तिवारी राजकीय अस्पताल में पिछले 14 सालों से दिल के डॉक्टर की तैनाती नहीं हो पाई है। इसकी वजह से यहां पर दिल का उपचार करवाने के लिए आने मरीजों को निजी अस्पतालों में उपचार करवाना पड़ रहा है।
अस्पताल में जहां हृदय चिकित्सक के पद पर वर्षों से तैनाती नहीं हुई है। वहीं हृदय संबंधित जांचों के लिए कैथ लैब की भी कोई व्यवस्था नहीं है। हर रोज दूरदराज से आने वाले हृदय के गंभीर मरीजों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। बता दें कि वर्ष 2008 से सुशीला तिवारी अस्पताल में हृदय चिकित्सक का पद रिक्त है।
इससे पहले डॉ. दीप पंत ने अस्पताल में अपनी सेवाएं दीं। करीब डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में डॉ. पंत ने रोजाना 100 से 150 मरीजों का इलाज कर उन्हें उचित परामर्श दिया, लेकिन अस्पताल में सुविधाओं के अभाव के चलते कुछ समय बाद ही उन्होंने त्यागपत्र दे दिया। तब से लेकर आज तक अस्पताल हृदय चिकित्सक की कमी से जूझ रहा है।
यूं तो अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्सक व प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी सप्ताह में दो दिन मंगलवार और शुक्रवार को हृदय रोगियों की ईको, टीएमटी व होल्टर जांच करते हैं, लेकिन हृदय चिकित्सक व कैथ लैब के न होने से एंजियोप्लास्टी और एंजियोग्राफ जैसी महत्वपूर्ण जांचों के लिए मरीजों को बाहर के अस्पतालों की शरण लेनी पड़ रही है। वहीं गंभीर मरीजों को अस्पताल से रेफर किया जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन हृदय चिकित्सक की नियुक्ति को लेकर प्रयास करने का दावा कर रहा है, लेकिन उसे कोई सफलता नहीं मिल पाई है।
2004 से नहीं बढ़े जांचों के रेट
एसटीएच में हृदय रोगियों की होने वाली जांचों के रेट वर्ष 2004 से नहीं बढ़ रहे हैं। अस्पताल में आज भी पूर्व निर्धारित दामों पर ही मरीजों की जांच की जा रही हैं। मरीजों से ईको के 150, टीएमटी और होल्टर के 100 के रुपये लिए जाते हैं।
हृदय चिकित्सक की तैनाती की लिए शासन को पूर्व में प्रस्ताव भेजा गया है। कैथ लैब के लिए भी पूर्णकालिक कार्डियोलॉजिस्ट, पूर्ण प्रशिक्षण प्राप्त नर्स और टेक्नीशियन की जरुरत होगी। मरीजों की परेशानी देखते हुए कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती के लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं।
डॉ. अरुण जोशी, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
