सांसदों से समर्थन जुटाने का प्रयास करेंगे बिजली कर्मचारी

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Edited By Amrit Vichar
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लखनऊ। बिजली कर्मचारियों एवं इंजीनियरों के दो अगस्त को दिल्ली में होने वाले राष्ट्रीय अधिवेशन में सांसदों को आमंत्रित कर उनसे इलेक्ट्रीसिटी (अमेंडमेंट) बिल के विरोध में समर्थन जुटाने का प्रयास किया जायेगा। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने रविवार को बताया कि सम्मेलन में सभी राजनीतिक दलों के प्रमुख सांसदों …

लखनऊ। बिजली कर्मचारियों एवं इंजीनियरों के दो अगस्त को दिल्ली में होने वाले राष्ट्रीय अधिवेशन में सांसदों को आमंत्रित कर उनसे इलेक्ट्रीसिटी (अमेंडमेंट) बिल के विरोध में समर्थन जुटाने का प्रयास किया जायेगा।

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने रविवार को बताया कि सम्मेलन में सभी राजनीतिक दलों के प्रमुख सांसदों को निमंत्रित किया गया है। सम्मेलन में एक प्रस्तुतीकरण के जरिये इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2022 के दुष्परिणामों से सांसदों को अवगत कराया जाएगा और इसके विरोध में उनसे जन आंदोलन के लिये समर्थन मांगा जाएगा ।

उन्होंने बताया कि दिल्ली में हो रहे राष्ट्रीय सम्मेलन में डीएमके, टीआरएस,एनसीपी,आम आदमी पार्टी, सीपीएम, सीपीआई, शिवसेना तृणमूल कांग्रेस, सपा, झारखंड मुक्ति मोर्चा, राष्ट्रीय जनता दल, के प्रमुख सांसदों के सम्मिलित होने की उम्मीद है। सरकार बिल को संसद में जोर जबरदस्ती से पारित कराने की कोशिश करती है तो देश भर के तमाम 27 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर आंदोलन करने के लिये बाध्य होंगे।

दुबे ने कहा कि फेडरेशन बिजली कंपनियों के बारे में शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का स्वागत करती है। उनके वक्तव्य से बिल्कुल स्पष्ट हो गया है कि सरकारी क्षेत्र की बिजली वितरण कंपनियां सरकारों की गलत नीति का शिकार है और यदि सरकारें समय से सब्सिडी और बिजली बिलों का भुगतान करें तो बिजली कंपनियों के समक्ष कोई वित्तीय संकट नहीं है ।

इसलिये इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2022 के जरिए बिजली वितरण के निजी करण का प्रस्ताव वापस लिया जाना चाहिए और सरकारी क्षेत्र की बिजली वितरण कंपनियों को बिना सरकारी हस्तक्षेप के स्वतंत्र रूप से कार्य करने का अवसर दिया जाना चाहिए।

पढ़ें-लखनऊ: सोमवार से शुरू करेंगे बिजली कर्मचारी राष्ट्रव्यापी कार्य बहिष्कार

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