हल्द्वानी: नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़ रहे ‘मेरि भाषा मेरि पछ्याण’ से जुड़े कवि और साहित्यकार

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हल्द्वानी, अमृत विचार। देवभूमि उत्तराखंड की अतुलनीय लोक संस्कृति और भाषा बोली के संवर्धन और संरक्षण के लिए ‘मेरि भाषा मेरि पछयाण कुमाऊंनी संवर्धन समिति’ हल्द्वानी से जुड़े कवि और साहित्यकार जुटे हुए हैं। इसी क्रम में समिति की मासिक बैठक वरिष्ठ कवयित्री और समिति की उपाध्यक्ष बीना भट्ट बड़शिलिया के आवास पर आयोजित की …

हल्द्वानी, अमृत विचार। देवभूमि उत्तराखंड की अतुलनीय लोक संस्कृति और भाषा बोली के संवर्धन और संरक्षण के लिए ‘मेरि भाषा मेरि पछयाण कुमाऊंनी संवर्धन समिति’ हल्द्वानी से जुड़े कवि और साहित्यकार जुटे हुए हैं।

इसी क्रम में समिति की मासिक बैठक वरिष्ठ कवयित्री और समिति की उपाध्यक्ष बीना भट्ट बड़शिलिया के आवास पर आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता ब्रिगेडियर धीरेश कुमार जोशी ने की। बैठक में नई पीढ़ी के बीच कुमाऊंनी बोली को अधिक से अधिक लोकप्रिय बनाने पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि घर परिवार में जब बड़े बुजुर्ग कुमाऊंनी बोली में बात करेंगे तो नई पीढ़ी का भी बोली के प्रति जुड़ाव बढे़गा। इस मौके पर आयोजित कुमाऊंनी कवि सम्मेलन में लोक गायिका लीला मनराल ने ‘कुमाऊंनी भाषा संस्कृति’, युवा कवि त्रिवेंद्र जोशी ने ‘लै जो हर्याव’, युवा कवि सुंदर लाल मदन ने ‘चार दिनी जिन्दगी’ कविता सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

वरिष्ठ साहित्यकार ‘गौरीशंकर वशिष्ठ निर्भीक’ ने कुमाऊंनी बोली की वर्तमान स्थिति पर विचार साझा किए। धीरज पांडे ने ‘लतर पतर’ कविता से सबको ठहाके लगाने को मजबूर कर दिया। कवयित्री मंजू पांडे उदिता और ब्रिगेडियर धीरेश कुमार जोशी कुमाऊंनी बोली के उत्थान और संस्कृति के महत्व पर विचार रखे। संचालन कर रहीं वरिष्ठ कवयित्री तारा पाठक ने बीना भट्ट बड़शिलिया को समिति से संबंधित प्रपत्र और जिम्मेदारी सौंपी।

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