हल्द्वानी: बस्ती बचाने और भिक्षावृत्ति रोकने को प्रधानमंत्री मोदी और सीएम धामी को भेजा बाबा का रक्षा सूत्र और पत्र

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भूपेश कन्नौजिया, हल्द्वानी। वो पहले कूड़ा बीनने का प्लास्टिक का कट्टा कंधे पर लटकाए फिरते थे मगर अब उनके कंधों पर स्कूली बस्ता है, जो मां-बाप पढ़ने के लिए स्कूल भेजने से कतराते थे अब वे खुशी-खुशी बच्चों को वीरांगना संस्था के छोटे से विद्यालय में प्रारंभिक शिक्षा के लिए भेज रहे हैं। भेजें भी …

भूपेश कन्नौजिया, हल्द्वानी। वो पहले कूड़ा बीनने का प्लास्टिक का कट्टा कंधे पर लटकाए फिरते थे मगर अब उनके कंधों पर स्कूली बस्ता है, जो मां-बाप पढ़ने के लिए स्कूल भेजने से कतराते थे अब वे खुशी-खुशी बच्चों को वीरांगना संस्था के छोटे से विद्यालय में प्रारंभिक शिक्षा के लिए भेज रहे हैं। भेजें भी क्यों न अब उन्हें शिक्षा के महत्व का जो पता चल चुका है।

खैर इन बच्चों की शिक्षा-दिक्षा तो सही चल रही है मगर अब इनमें बस्ती उजड़ने का डर है क्योंकि इनकी गफूर बस्ती रेलवे भूमि पर बसी है और रेलवे अपनी भूमि खाली करवा रहा है ऐसे में न तो इनके पुनर्वास के लिए कुछ सोचा गया है न भविष्य के बारे में..इसी भय के साय में ये बच्चे पढ़ाई को अपने सेंटर तक पहुंच तो रहे हैं पर कल क्या हो इस बात से भी सहमे हुए हैं।

इस राखी के त्योहार में इन बच्चों ने प्रधानमंत्री मोदी और सीएम उत्तराखंड पुष्कर सिंह धामी को राखी भेजकर बस्ती को उजाड़े जाने से रोकने, पुनर्वास करने और भिक्षावृत्ति को जड़ से खत्म करने को पत्र लिखा है साथ ही बाबा नीम करौली की तस्वीर वाली स्पेशल राखी भी भेजी है।

एक पन्ने के पत्र में छात्रा सोमा ने यूपी की भांति उत्तराखंड में भी बाल श्रमिक विद्याधन योजना शुरू किए जाने की मांग की है। साथ ही मोदी जी से मिलने की गुहार भी लगायी है। फिलहाल छात्रों को उम्मीद है कि उन्हें प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से मिलने का मौका जरुर मिलेगा और वे उन्हें राखी भेजकर बेहद खुश हैं।

नीम करौली बाबा निराश नहीं करते
संस्था की अध्यक्ष गुंजन अरोड़ा का कहना है कि उनकी और विद्यालय के बच्चों की बाबा नीम करौली पर गहरी आस्था है और यही आस्था बच्चों की दुआ जरूर कबूल करवाएगी। वहीं बच्चों का कहना है कि मोदी जी की मन की बात तो हम सुनते ही हैं इस बार उन्हें अपने मन की बात भेजी है और इसीलिए रक्षा सूत्र में बाबा नीम करौली की तस्वीर वाली राखी भी भेजी है ताकि वह हमारे साथ न्याय करें।

जहां सीखा पढ़ना-लिखना वहीं से लिखा पीएम मोदी को चिट्ठी
पीएम मोदी को पत्र लिखने वाली छात्रा सोमा पहले भिक्षावृत्ति करती थी और वीरांगना संस्था ने ही उसे पढ़ने-लिखने लायक बनाया। पीएम मोदी को भेजे गए पत्र को उसी ने लिखा है। उसका कहना है कि पढ़ लिख कर अपने परिवार का सहारा बनना है साथ ही बस्ती के अन्य लोगों और बच्चों को भी वह घर जाने के बाद पढ़ाती है। छोटे बच्चों को कहानियां सुनाती है तो मां-पिता को मोबाइल चलाना और अखबार की खबरें पढ़ कर सुनाती है। उसका सपना है कि वह बढ़े होकर शिक्षिका बने और समाज में फैली कुरीतियों के साथ अपने लोगों के उत्थान के लिए कार्य करे।

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