मुरादाबाद : बच्चों का भविष्य संवारने को मजदूर बन गईं प्रधानाध्यापिका मनीला शर्मा
विनोद श्रीवास्तव, अमृत विचार। इसे तंत्र की लापरवाही पर तमाचा कहें या एक सच्चे शिक्षक धर्म का निर्वाह। अपने छात्रों के शिक्षा की राह में रुकावट को दूर करने के लिए प्राथमिक विद्यालय कुंदनपुर की प्रधानाध्यापिका मनीला शर्मा ने विद्यालय परिसर में मिट्टी के कीचड़ में तब्दील होने और उन गड्ढों में बच्चों को गिरता …
विनोद श्रीवास्तव, अमृत विचार। इसे तंत्र की लापरवाही पर तमाचा कहें या एक सच्चे शिक्षक धर्म का निर्वाह। अपने छात्रों के शिक्षा की राह में रुकावट को दूर करने के लिए प्राथमिक विद्यालय कुंदनपुर की प्रधानाध्यापिका मनीला शर्मा ने विद्यालय परिसर में मिट्टी के कीचड़ में तब्दील होने और उन गड्ढों में बच्चों को गिरता देख द्रवित हो उठीं, उन्होंने हौसला दिखाते हुए मजदूर बनकर परिसर में ईंटें बिछाकर बच्चों के सुरक्षित आने जाने का रास्ता बना डाला।
प्रेरणादायक
- आपरेशन कायाकल्प में ठेकेदारों की लापरवाही बच्चों और शिक्षकों पर भारी पड़ता देख ईंट बिछाकर बनाया रास्ता
- कार्य अधूरा छोड़ने से मिट्टी बारिश में कीचड़ में तब्दील हो गई थी, गड्ढों में बच्चों को गिरता देख द्रवित हुईं प्रधानाध्यापिका
- प्रधानाध्यापिका ने शिक्षकों और अभिभावकों के साथ मिलकर ईंटें बिछाकर बनाया रास्ता
आपरेशन कायाकल्प में जर्जर स्कूलों में स्मार्ट सिटी मिशन के अन्तर्गत चल रहे कार्य की कच्छप गति से यह सुविधा की बजाय असुविधा का सबब बन गया है। कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम की लचर कार्यप्रणाली और ठेकेदारों की मनमानी शिक्षण कार्य पर भारी पड़ रही है। बरसात में विद्यालय परिसर में कीचड़ से आवागमन मुश्किल होता है। बारिश में प्राथमिक विद्यालय कुंदनपुर के परिसर में कीचड़ और गड्ढे में भी बच्चे गिरते पड़ते स्कूल आने को विवश थे। 19 अगस्त की रात में बारिश में प्राथमिक विद्यालय कुंदनपुर में परिसर में छोड़े गए मिट्टी के ढेर और गड्ढे में बच्चों को गिरता देख प्रधानाध्यापिका मनीला शर्मा का हृदय द्रवित हो उठा।

बच्चों को दर्द से कराहता देख उन्होंने परिसर में आने-जाने का रास्ता सुचारु करने की ठान ली। फिर क्या था ईंटें मंगाकर वह खुद एक मजदूर की तरह काम में जुटकर सड़क बनाने लगीं। यह देखकर स्कूल के सहायक अध्यापक डॉ. विनीत कुमार, एसएमसी की सदस्य मोनिका, अमरपाल और अनुचर सुमन देवी ने भी सहयोग के लिए हाथ बढ़ाया। अब बच्चे और शिक्षक आसानी से स्कूल में आकर अपना दायित्व निभा रहे हैं।
48 स्कूलों का 91 करोड़ रुपये की लागत से होना है कायाकल्प
स्मार्ट सिटी परियोजना में आपरेशन कायाकल्प के अन्तर्गत बेसिक शिक्षा परिषद के नगर क्षेत्र के 48 स्कूलों में 91 करोड़ की लागत से जर्जर स्कूलों का जीर्णोद्धार कार्य चल रहा है। इस कार्य की शुरुआत जनवरी में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के ठीक पहले मंडलायुक्त आन्जनेय कुमार सिंह व नगर आयुक्त संजय चौहान ने कन्या प्राथमिक विद्यालय दांग में भूमिपूजन कर की थी, लेकिन कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम के द्वारा कराए जा रहे कार्य में संस्था के प्रतिनिधियों और ठेकेदारों की लापरवाही शिक्षण कार्य में खलल डाल रही है। कई महीने से चल रहे कार्य में आधी प्रगति भी नहीं हुई है। ऊपर से जर्जर कमरों को ध्वस्त कर उसकी ईंट, मिट्टी को जहां तहां छोड़ दिया गया है।
प्राथमिक विद्यालय शाहपुर तिगरी में फैल चुका है करंट
पिछले माह प्राथमिक विद्यालय शाहपुर तिगरी में बरसात के दौरान लगे बीम के छड़ से हाइटेंशन लाइन से छू जाने से करंट फैलने की घटना हो चुकी है। यहां भी प्रधानाध्यापिका नीतू सिंह की सूझबूझ और बीएसए की तत्परता से किसी तरह बच्चों को स्कूल से सुरक्षित निकाला।
खुद प्रधानाध्यापिका भी हो चुकी हैं चोटिल
प्राथमिक विद्यालय कुंदनपुर में परिसर में खोदाई कर निकाली गई चिकनी मिट्टी से जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। इससे इन गड्ढों और कीचड़ में गिरने से स्कूल के चार बच्चे गिरकर चोटिल हो चुके हैं। यहां तक कि प्रधानाध्यापिका मनीला शर्मा खुद गिरकर चोटिल हो चुकी हैं।
कई बार पत्र लिखने के बाद भी नहीं हो रहा सुधार
आपरेशन कायाकल्प के अन्तर्गत चल रहे नगर क्षेत्र के स्कूलों में जीर्णोद्धार कार्य की सुस्त चाल पर बीएसए बुद्ध प्रिय सिंह खुद निरीक्षण में खामी मिलने पर नाराजगी जता चुके हैं। यहां तक कि उन्होंने कार्यदायी संस्था के परियोजना प्रबंधक को पत्र भी लिखा है, लेकिन फिर भी कोई फर्क नहीं पड़ा। इस महीने के शुरुआत में समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार सिंह भी कार्य की धीमी प्रगति पर लापरवाही जता चुके हैं।
तीन साल से इस स्कूल में प्रधानाध्यापिका हैं मनीला
प्राथमिक विद्यालय कुंदनपुर में वर्तमान छात्र संख्या 170 है। यहां दो कमरों में किसी तरह मजबूरी में कक्षा एक से पांच तक की पढ़ाई होती है। तीन साल से मनीला यहां प्रधानाध्यापिका का दायित्व निभा रही हैं। उनका कहना है कि अपने स्कूल के छात्रों का भविष्य संवारना उनका शिक्षक व मानव धर्म है। बच्चे स्कूल में सुरक्षित आकर पढ़ाई कर अपना भविष्य बना सकें यह देखना हमारा शिक्षक व नैतिक धर्म है। इसमें ईंट बिछाने में भी उन्हें कोई हिचक या शर्म नहीं है।
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