जिस नशे से गई Sonali Phogat की जान, जानिए कितना खतरनाक Methamphetamine

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पणजी। बीजेपी की नेता रही सोनाली फोगाट (Sonali Phogat ) की गोवा में मौत हो गई थी। पहले उनकी मौत को दिल के दौरे से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने सारे राज खोल दिए। उन्हें ड्रग देकर मौत के आगोश में धकेलने की पुष्टि हुई तो उनके हत्या आरोपियों ने उन्हें …

पणजी। बीजेपी की नेता रही सोनाली फोगाट (Sonali Phogat ) की गोवा में मौत हो गई थी। पहले उनकी मौत को दिल के दौरे से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने सारे राज खोल दिए। उन्हें ड्रग देकर मौत के आगोश में धकेलने की पुष्टि हुई तो उनके हत्या आरोपियों ने उन्हें ड्रिंक में मिलाकर ड्रग देने की बात कबूली। यहीं नहीं, आरोपी सुधीर सांगवान (Sudhir Sangwan) के खुलासे के आधार पर कर्लीज (Curlies) रेस्टोरेंट के वॉशरूम से सोनाली को दी गई ड्रग्स (Drug) भी जब्त की गई हैं। जब्त की गई ये ड्रग मेथामफेटामाइन (Methamphetamine) थी।

बता दें कि गोवा पुलिस ने सोनाली फोगाट की मौत के मामले में एक और ड्रग डीलर रमादास मांडरेकर को गिरफ्तार किया है जिसपर सोनाली को ड्रग देने वाले डीलर तक ड्रग्स पहुंचाने का आरोप है। पुलिस अब तक 5 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है जिनमें आरोपी सुधीर सांगवान, सुखविंदर सिंह, कर्लिज़ रेस्टोरेंट (गोवा) का मालिक और एक ड्रग डीलर शामिल हैं।

क्या है मेथामफेटामाइन?
मेथामफेटामाइन की बात करें तो इसकी खोज 1893 में हुई थी। इसे क्रैंक, स्पीड और मैथ के नाम से भी जाना जाता है जिसका सेवान नशे के लिए किया जाता है। यह शक्तिशाली उत्तेजक है, जो सीधा तौोर पर केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर असर डालता है। मेथामफेटामाइन बहुत ही नशीला होता है। इस ड्रग्स का शरीर में पता लगाने के लिए यूरिन टेस्ट किया जाता है। सामान्य तौर पर इस ड्रग्स को सूंघकर या फिर खाकर लिया जाता है। इसे इंजेक्शन के जरिए भी नसों में लिया जाता है।

कितना खतरनाक है ये ड्रग्स
आमतौर पर इस ड्रग्स का असर 6-8 घंटे तक रहता है। कभी-कभी इसका असर 24 घंटे तक भी रहता है। इस ड्रग्स का इस्तेमाल करने वाले को बहुत ही खुशी का एहसास होता है। मेथामफेटामाइन दिखने में काफी चमकीला क्रिस्टल जैसा होता है। अगर इसके स्वाद की बात करें तो यह कड़वे पाउडर या कड़वी गोली की तरह होता है। इसकी रासायनिक संरचना एम्फैटैमिन जैसी होती है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से चिकित्सा के क्षेत्र में एडीएचडी या नार्कोलेप्सी में किया जाता है।

शरीर पर क्या होता है असर
मेथामफेटामाइन के इस्तेमाल से शऱीर का केंद्रीय तंत्रिका तंत्र आंशिक तौर पर काम करना बंद कर देता है। इससे भ्रम, गुस्सा और हिंसा जैसी प्रवृत्ति उत्पन्न होती है। इसका असर सीधे तौर पर दिमाग पर होता है। यह डोपामाइन कैमिकल को बढ़ा देता है। जिसकी वजह से शरीर में खुशी, उत्साह, जोश की अनुभूति होती है। यही वजह है कि इसका इस्तेमाल करने वाला अस्थायी तौर पर बहुत खुशी महसूस करता है। इसका सेवन एक बार करने से बार-बार सेवन करने की इच्छा उत्पन्न होती है।

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