हल्द्वानी: घुप अंधेरे में पहुंची एसडीआरएफ, मलबे में दफन मिला नरसिंह का शव

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हल्द्वानी, अमृत विचार। जल्दबाजी के चक्कर में जान गंवाने वाले नरसिंह को समय से पहले गधेरे से निकाला जा सकता था, लेकिन आपदा में टूटी सड़कों की समय से मरम्मत न हो पाने की वजह से एसडीआरएफ को दुश्वारियों का सामना करना पड़ा। अपनी गाड़ी छोड़नी पड़ी, कई किलो मीटर का पैदल सफर तय कर …

हल्द्वानी, अमृत विचार। जल्दबाजी के चक्कर में जान गंवाने वाले नरसिंह को समय से पहले गधेरे से निकाला जा सकता था, लेकिन आपदा में टूटी सड़कों की समय से मरम्मत न हो पाने की वजह से एसडीआरएफ को दुश्वारियों का सामना करना पड़ा। अपनी गाड़ी छोड़नी पड़ी, कई किलो मीटर का पैदल सफर तय कर एसडीआरएफ के जवान घटना स्थल तक पहुंची। रात लाश के पास गधेरे में गुजारी और सुबह की पहली पौ फूटने के साथ शव को गधेरे से बाहर निकाला गया।

ओखलकांडा ब्लॉक के गाजा निवासी नरसिंह (52) रविवार को एक टैक्सी में सवार होकर हल्द्वानी से अपने गांव जा रहे थे। पहाड़ पर तेज बारिश की वजह से हैड़ाखान की ओर जाने वाले रोड पर पवास गधेरा उफान पर था। टैक्सी चालक की हिम्मत नहीं हुई कि वो तेज बहाव में गधेरा पार कर सके, लेकिन घर जाने की जल्दी में नरसिंह ने पैदल ही गधेरा पार करने का फैसला कर लिया और बह गया।

रात साढ़े नौ बजे के करीब एसडीआरएफ को सूचना मिली। एसआई मनोज रावत अपनी टीम के साथ रेस्क्यू के लिए रवाना हो गए, लेकिन 15 किमी चलने के बाद ही सड़क ब्लॉक थी। एसडीआरएफ को अपनी गाड़ी वहीं छोड़नी पड़ी। करीब दो किमी पैदल चलने के बाद एक प्राइवेट वाहन मिला, लेकिन करीब आठ किमी बाद सड़क फिर ब्लॉक थी।

एसडीआरएफ ने यहां से फिर करीब छह किमी का पैदल सफर किया और पवास गधेरे तक पहुंची। यहां से टीम ने गधेरे के रास्ते नदी की ओर उतरना शुरू किया। करीब दो किमी पैदल रेस्क्यू के बाद टीम को नरसिंह मिल गए, लेकिन मृत और मलबे में दफन। रात के करीब ढाई बज चुके थे और अंधेरे में शव को ऊपर ले जाना मुम्किन नहीं था। टीम ने सुबह होने का इंतजार किया और सुबह करीब साढ़े पांच बजे शव को ऊपर लाया गया। एसडीआरएफ की टीम में एसआई मनोज रावत के साथ कां.सुरेंद्र, महेंद्र, प्रदीप मेहता और कृष्णा थे।

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