हल्द्वानी: अब पुलिस की जेब में होगा हर छोटे-बड़े अपराधी का बही खाता

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हल्द्वानी, अमृत विचार। डिजिटल पुलिसिंग की ओर बढ़ रही कुमाऊं पुलिस को अपराधियों का डाटा कागज में दर्ज नहीं करना होगा, बल्कि अपराधियों के साथ हर छोटी से बड़ी जानकारी अब पुलिस की जेब में होगी। पुलिसिंग की रीढ़ कहे जाने वाले बीट पुलिस कर्मियों को भी डिजिटल किया जा रहा है और इसकी प्रक्रिया …

हल्द्वानी, अमृत विचार। डिजिटल पुलिसिंग की ओर बढ़ रही कुमाऊं पुलिस को अपराधियों का डाटा कागज में दर्ज नहीं करना होगा, बल्कि अपराधियों के साथ हर छोटी से बड़ी जानकारी अब पुलिस की जेब में होगी। पुलिसिंग की रीढ़ कहे जाने वाले बीट पुलिस कर्मियों को भी डिजिटल किया जा रहा है और इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

डीआईजी नीलेश आनंद भरणे ने बताया कि बीट पुलिस ही पुलिस की सूचनाओं का आधार है और इसे मजबूत किया जाएगा। अपने क्षेत्र की गली-गली से वाकिफ रहने वाले इन बीट कर्मियों को पहले हर छोटी-बड़ी बात कागज में रखने पड़ती थी। दिक्कत तब होती है जब इन बीट कर्मचारियों का तबादला कर दिया जाता है। क्योंकि तबादले के साथ अहम जानकारियां भी उक्त कर्मी के साथ चली जाती थीं, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।

बीट कर्मी के लिए ठीक उसी तरह सीयूजी नंबर जारी किए जाएंगे, जैसे सभी थानाध्यक्षों के पास होते हैं। जिसके बाद बीट कर्मी अपने क्षेत्र की सभी छोटी-बड़ी जानकारियां मोबाइल में अंकित करेगा और तबादले के वक्त वह उक्त सिम या मोबाइल को चार्ज लेने वाले बीट कर्मी के सुपुर्द कर देगा। सिम और ई-बीट पुलिसिंग में होने वाले खर्च के लिए पुलिस मुख्यालय को लिखा गया है। हालांकि प्राथमिक प्रयोग कुमाऊं में शुरू कर दिया गया है। डीआईजी नीलेश आनंद भरणे ने बताया कि यह व्यवस्था ठीक दिल्ली पुलिस की तर्ज पर लागू की जाएगी।

नैनीताल की निगरानी कर रहे 28 कैमरे
हल्द्वानी। डीआईजी ने बताया कि नव निर्मित भवन के परिक्षेत्रीय पुलिस कंट्रोल रूम में नैनीताल क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी तथा यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए लगाए गए 28 सीसीटीवी कैमरों का लाइव विडियो देखकर मॉनिटरिंग की जा रही है। शहर में किसी भी संदिग्ध गतिविधि या यातायात बाधित होने पर संबंधित थाना और चौकी को संदेश प्रसारित किया जाता है।

डिजिटल हो रहा 20 साल का मैनुअल डाटा
हल्द्वानी। डीआईजी ने बताया कि परिक्षेत्रीय कार्यालय को कॉरपोरेट ऑफिस की तर्ज पर अत्याधुनिक रूप देते हुए विगत 20 वर्षों के मैनुअल डाटा को कम्यूटर फॉर्म में डिजिटाइज किया जा रहा है। डाटा साझा करने के लिए कार्यालय के 22 कम्प्यूटरों को लोकल एरिया नेटवर्किंग प्रणाली से जोड़ा गया है। डाटा सुरक्षित रखने के लिए डीआईजी रेंज कार्यालय में आठ कंप्यूटर लगाए गए हैं। इसी प्रकार हल्द्वानी के कंप्यूटर को सर्वर से जोड़ दिया गया है।

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