माल न होना बढ़ा रहा उद्योगों का संकट: सुरेश सुंदरानी

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बरेली,अमृत विचार। कोरोना के साइड इफेक्ट से बाजार थम गए, कल कारखाने थम गए। जब दोनों थम गए तो और आपूर्ति यानी वह पटरी जिस पर अर्थव्यवस्था की गाड़ी दौड़ती है। जब वह पटरी ही नहीं तो उद्यमी कैसे कारोबार की गाड़ी को रफ्तार दें। यह कहना है इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए)के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व …

बरेली,अमृत विचार। कोरोना के साइड इफेक्ट से बाजार थम गए, कल कारखाने थम गए। जब दोनों थम गए तो और आपूर्ति यानी वह पटरी जिस पर अर्थव्यवस्था की गाड़ी दौड़ती है। जब वह पटरी ही नहीं तो उद्यमी कैसे कारोबार की गाड़ी को रफ्तार दें। यह कहना है इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए)के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व जिले के बड़े उद्यमी उद्यमी सुरेश सुंदरानी का।

उन्होंने बताया कि लाकडाउन में उद्योग शुरू करने की शासन से अनुमति मिली, लेकिन 80 फीसदी उद्योगों के सामने आज सबसे बड़ा सवाल यह है कारखाने खुले रहे हैं, बाजार भी खुल रहे हैं, मगर पांबदियों के साथ। ऐसे में उद्योग चलाने का खर्च वहीं है, क्योंकि बिजली की खपत वहीं है। कच्चे माल, मशीनरी पार्टस व श्रमिकों की समस्या भी बनी है। एडवांस में रकम देने पर भी मुंबई, दिल्ली समेत कई बाहरी राज्यों से माल लाने को ट्रांसपोर्टर्स राजी नहीं है। जिस कारण पूरा क्षमता से कारखानों का संचालन नहीं हो पा रहा। इससे उत्पादन कम हो रहा है वहीं लागत बढ़ रही है। थोक कारोबारियों की हालत भी पतली है। तैयार माल के लिए बाजार नहीं है।

दूसरा कोरोना के बढ़ते मामलों से उद्यमि चिंतित हैं। उनको भी फैक्ट्री संचालन में जरा सी चूक से इसके सील होने का डर है। लाकडाउन में गैर राज्यों से लौटे प्रवासियों को प्राथमिकता पर रोजगार मुहैया कराने में आ रही दिक्कत को साझा करते हुए सुरेंश सुंदरानी ने बताया कि इसमें सबसे बड़ी समस्या यह है कि 80 फीसदी प्रवासी फैक्ट्री की जरूरत के हिसाब से हुनरमंद नहीं है। अधिकांश दर्जी, राजमिस्त्री, कारपेंटर का कार्य जानते हैं, जिनकी यहां फैक्ट्रियों जरूरत नहीं है।

यह भी बताया उद्यमियों की सहूलियत व प्रवासियों को रोजगार उनके हुनर के हिसाब से मिल सके इसके लिए प्रशासन से मिली सूची आईआईए की वेबसाइट पर अपलोड की गई। इसमें भी तमाम खामियां उजागर होने की बात कही।

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