उत्तराखंड के इस मंदिर में मुराद होने पर पूरे नौ दिन जलाए जाते हैं अखंड नौ दिए
हल्द्वानी, अमृत विचार। देवभूमि उत्तराखंड में विंध्यवासिनी बानड़ी देवी माता एक ऐसा मंदिर है जहां आपकी मनोकामना पूर्ण होने पर आपको मंदिर में नौ अखंड दिए जलाने पड़ते हैं। यह मंदिर अल्मोड़ा से 34 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लमगड़ा गांव में है। यहां मुराद पूरी होने पर दिए के अलावा के साथ पूरे नौ …
हल्द्वानी, अमृत विचार। देवभूमि उत्तराखंड में विंध्यवासिनी बानड़ी देवी माता एक ऐसा मंदिर है जहां आपकी मनोकामना पूर्ण होने पर आपको मंदिर में नौ अखंड दिए जलाने पड़ते हैं। यह मंदिर अल्मोड़ा से 34 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लमगड़ा गांव में है।

यहां मुराद पूरी होने पर दिए के अलावा के साथ पूरे नौ दिनों तक आराधना करनी पड़ती है। यह देश का ऐसा पहला मंदिर है, जहां इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालु अखंड दिए जलाते हैं। इस मंदिर में नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की सबसे अधिक भीड़ देखने को मिलती है।
ऐसा कहा जाता है कि अल्मोड़ा की स्थापना 1563 में चंद राजा बालो कल्याण चंद ने की थी। उस समय वह मां बाराही देवी का विसर्जन करना भूल गए। उस समय देवी ने राजा से कहा कि उन्हें वहीं स्थापित रहने दिया जाए। यहां देवी भगवती पिंडी के तीन शक्ति रूप में वास करती हैं। उसी समय से मंदिर में स्थानीय लोग पूजा अर्चना के लिए आते हैं। जिस किसी की भी मनोकामना पूरी हो जाती है, वह मां के आगे अखंड दिए जलाते हैं।
जिसकी वहां के पंडित नौ दिनों तक देखरेख भी करते हैं। इसके अलावा मां को प्रसन्न करने के लिए सुहागपिटारी भी यहां श्रद्धालु चढ़ाते हैं। वहीं आजकल नवरात्रों में मदिर में भक्तों की खासी भीड़ है और भक्त भक्ति भाव से भंडारे का भी आयोजन करवाते हैं।
