ऐतिहासिक है मुरादाबाद का 84 घंटा मंदिर, भक्तों की मनोकामना होती है पूरी
मुरादाबाद। शहर के किसरौल मोहल्ले में स्थित श्री कामेश्वरनाथ बाबा 84 घंटा मंदिर का इतिहास हजारों साल पुराना है। इस पर खोज करने के लिए 1982 में लखनऊ से पुरातत्व विभाग की टीम आई थी। वह मंदिर में खड़े पीपल के वृक्ष की छाल अपने साथ ले गई थी। अपने नाम के अनुरूप 84 घंटा …
मुरादाबाद। शहर के किसरौल मोहल्ले में स्थित श्री कामेश्वरनाथ बाबा 84 घंटा मंदिर का इतिहास हजारों साल पुराना है। इस पर खोज करने के लिए 1982 में लखनऊ से पुरातत्व विभाग की टीम आई थी। वह मंदिर में खड़े पीपल के वृक्ष की छाल अपने साथ ले गई थी। अपने नाम के अनुरूप 84 घंटा मंदिर भी अन्य मंदिरों से काफी अलग है। अन्य मंदिरों में मनोकामना पूर्ण होने पर जहां लोग नारियल आदि चढ़ाते हैं, वहीं श्रद्धालु इस मंदिर में पीतल का घंटा चढ़ाते हैं।
इस मंदिर में घंटा चढ़ाने की परंपरा वर्षों पुरानी है। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि नेपाल नरेश के यहां कोई संतान नहीं थी। तब उन्होंने इस मंदिर में आकर मन्नत मांगी थी। संतान होने पर उन्होंने सन 1911 में इस मंदिर में पीतल का घंटा चढ़ाया था। नेपाल नरेश द्वारा चढ़ाया गया घंटा आज भी मौजूद है। सावन के महीने में श्रद्धालु यहां 40 दिन तक रोजाना दीपक जलाने आते हैं और 41वें दिन उद्यापन करते हैं। श्रावण मास की शिवरात्रि पर हवन होता है।
मंदिर में मां दुर्गा, राधा कृष्ण, राम दरबार, भगवान विष्णु, संतोषी माता, भैरो बाबा, हनुमान जी, ब्रह्म देव की प्रतिमाएं विराजमान हैं। चैत्र और शारदीय नवरात्र में भी बड़ी संख्या में माता रानी के भक्त यहां पहुंचते हैं। रेलवे स्टेशन मंदिर की दूरी पांच और रोडवेज से छह किलाेमीटर है। अपने साधन के अलावा ई-रिक्शा तथा ऑटो से मंदिर पहुंच सकते हैं।बर्तन कारोबारी विकास ने बताया कि इस मंदिर की दूर-दूर तक मान्यता है।
पुजारी विष्णु दत्त शर्मा कहा कहना है कि मनोकामना पूरी होने पर घंटे चढ़ाते हैं और भंडारा करते हैं। वह खुद भी 13 साल से लगातार मंदिर आ रहे हैं। 57 वर्षीय रामप्रकाश का मानना है कि सच्चे मन से यहां आकर बाबा के दरबार में मत्था टेकने वालों की हर मुराद पूरी होती है।
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