हल्द्वानी: जनभावनाओं की उपेक्षा हुई तो उठने लगी मुख्यमंत्री धामी के इस्तीफे की मांग, खुला पत्र हो रहा वायरल
हल्द्वानी, अमृत विचार। उत्तराखंड में यूकेएसएसएससी पेपरलीक, विधानसभा भर्ती घोटाला और फिर पौड़ी की बेटी अंकिता भंडारी की निर्मम हत्या का मामला सामने आने के बाद आमजन का गु्स्सा सातवें आसमान पर है। बावजूद इसके धामी सरकार जनभावनाओं पर खरा उतरने में नाकाम रही है। युवा लगातार भर्ती घोटालों और अंकिता हत्याकांड की सीबीआई जांच …
हल्द्वानी, अमृत विचार। उत्तराखंड में यूकेएसएसएससी पेपरलीक, विधानसभा भर्ती घोटाला और फिर पौड़ी की बेटी अंकिता भंडारी की निर्मम हत्या का मामला सामने आने के बाद आमजन का गु्स्सा सातवें आसमान पर है। बावजूद इसके धामी सरकार जनभावनाओं पर खरा उतरने में नाकाम रही है। युवा लगातार भर्ती घोटालों और अंकिता हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं लेकिन धामी सरकार है कि जनभावनाओं को सिरे से नकारने में जुटी है। यही वजह है कि उत्तराखंड के 13 जिलों में इन दिनों विरोध की आग जल रही है। इस बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस्तीफे की मांग भी उठने लगी है।
हल्द्वानी निवासी युवा पहाड़ी कार्तिक उपाध्याय ने उत्तराखंड की आम जनता का विश्वास खो जाने एवं विपरीत परिस्थितियों में मुख्यमंत्री की भूमिका ना निभा पाने के कारण नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की मांग करते हुए पत्र लिखा है। यह पत्र सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।
वायरल हो रहे पत्र में युवा पहाड़ी कार्तिक उपाध्याय ने लिखा है कि वर्तमान परिस्थिति जो राज्य की बनी हुई है उसमें कहीं ना कहीं मुख्यमंत्री की कई ऐसी जिम्मेदारियां हैं जिन पर आप पूर्ण रूप से खरे नहीं उतर पा रहे हैं, इसका कारण क्या है यह मैं नहीं जानता। आज उत्तराखंड के युवा अपने वर्तमान और भविष्य को लेकर बहुत चिंतित हैं, वहीं दूसरी तरफ उत्तराखंड की बेटियां भी अंकिता प्रीति जैसे हत्याकांड के बाद असुरक्षित महसूस कर रही हैं।
महोदय, उत्तराखंड में जिस तरह लगातार भर्ती घोटाले सामने आए और प्रदेश भर के युवा उनकी सीबीआई जांच की मांग को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं, जो युवा पूरी लगन मेहनत के साथ भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे थे, उनकी उम्मीदों पर पूंजीवाद का डंडा कुछ ऐसा चला जिसका नतीजा यह निकला कि युवाओं का भविष्य खतरे में आ गया, लाखों-करोड़ों में पेपर बेच दिए गए और जिन्हें पकड़ा भी गया उनके ऊपर किसका संरक्षण था, यह आज तक नहीं पता चल सका। उसके बाद विधानसभा भर्ती घोटाला सामने आया जिसमें सीधे विधानसभा अध्यक्ष सवालों के घेरे में आ गए। उस पर भी अनौपचारिक तरीके से कार्यवाही हुई जिन्हें निकाला गया वह सभी कर्मचारी हाईकोर्ट की शरण में चले गए,लेकिन राज्य सरकार द्वारा अब तक विधानसभा भर्ती घोटाले में लिप्त नेताओं पर कोई कार्यवाही नहीं की गई।
वहीं दूसरी तरफ राज्य में गरीबी के कारण मजबूर होकर एक लड़की ने परिवार को आर्थिक तंगी से निकालने के लिए नौकरी करना चाहा तो उसके ऊपर भी मात्र 20 दिनों की नौकरी में अत्याचार शुरू हो गए बल्कि सिर्फ अत्याचार नहीं रसूखदार लोगों ने उसकी इज्जत से खेलना शुरू कर दिया। जब वह लड़की अपनी इज्जत को बचाने के लिए आवाज उठाने ही वाली थी उसकी हत्या कर दी गई और हत्या के आरोपी जो भी सामने निकल कर आए, वह भी रसूखदार एवं राजनीतिक परिवार से हैं और अब तक जिस तरह राजनीतिक व्यक्तियों द्वारा एवं आर्थिक रूप से मजबूत रसूखदारों द्वारा पूरी जांच को छिन्न-भिन्न कर दिया गया, उसके बाद भी राज्य सरकार अथवा आप यहां भी अपनी भूमिका निभाने में विफल रहे हैं जबकि अंकिता हत्याकांड के लिए भी पूरे प्रदेश भर में महिलाएं, युवा, वृद्ध लोग सड़कों पर उतरे हुए हैं। सिर्फ यही नहीं कानून व्यवस्था भी आपके राज्य में सफल नहीं है। हल्दूचौड़ लालकुआं का प्रिया हत्याकांड ही देखिए या फिर अल्मोड़ा का जगदीश हत्याकांड।
ऐसे में यह समझना आम नागरिक के बस का नहीं रहा आखिर आपकी ऐसी क्या मजबूरी है कि आप इन सभी अपराधों के लिए सीबीआई जांच अब तक नहीं करा पा रहे हैं। कई सवाल हैं जिनका जवाब बिना सीबीआई के मिलना आम नागरिक की नजर में संभव नहीं है। महोदय इसमें भी कोई दो राय नहीं है यदि किसी कक्षा के अनुत्तीर्ण हुए छात्र को विद्यालय अथवा विश्वविद्यालय का प्रधानाचार्य बना दिया जाए तो वह विद्यालय/विश्वविद्यालय अच्छी तरह नहीं चल पाएगा। ठीक उसी तरह उत्तराखंड की आम जनता ने आपको विधानसभा चुनाव में अनुत्तीर्ण कर दिया था,लेकिन आज यदि आप मुख्यमंत्री हैं तो वह अपने राजनीतिक दल एवं संबंधों के कारण हैं। अब ऐसे में राज्य की स्थिति को देखते हुए और अपनी विफलता को स्वीकारते हुए आपने स्वयं नैतिकता के आधार पर मुख्यमंत्री के पद से त्यागपत्र दे देना चाहिए क्योंकि अपने अब तक के कार्यकाल में आप जनता का विश्वास नहीं जीत पाए बल्कि आपके प्रति जनता के भीतर अविश्वास बहुत ज्यादा हो चुका है।
हालांकि आपने समर्थकों, भाजपा के समर्थकों के लिए भले ही अभी भी चहेते हों, लेकिन आपको और सरकार को वोट सिर्फ किसी एक दल के कार्यकर्ता ने नहीं दिया बल्कि पूरी आम जनता ने उत्तराखंड के मतदाताओं ने इस सरकार का निर्माण किया है। यह कड़वा सत्य है यदि यह खुला पत्र आप तक पहुंचा तो मैं यह जानता हूं आपको बिल्कुल अच्छा नहीं लगेगा, लेकिन हमारे पूर्वज कह कर गए हैं कि सत्य हमेशा कड़वा होता है जिसे सुनना और सहना आसान नहीं होता।
मैं आप से उम्मीद करता हूं कि आप अपनी विफलता को स्वीकार करेंगे और जल्द से जल्द नैतिकता के आधार पर त्यागपत्र देंगे, अन्यथा हम युवा मजबूर होकर संवैधानिक तरीके से आंदोलन कर आपके इस्तीफे के लिए राज्य एवं केंद्र के भीतर दबाव बनाएंगे।
