रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज में हाइडैटिड डिजीज का सफल रहा पहला ऑपरेशन
मनोज आर्या, रुद्रपुर। रुद्रपुर का पंडित रामसुमेर शुक्ल राजकीय मेडिकल कॉलेज की टीम उस वक्त एक युवक के लिए जीवनदायिनी बनी जब खटीमा का एक युवक हाइडैटिड डिजीज बीमारी से जूझ रहा था। आर्थिक कमजोरी के कारण पीड़ित चिकित्सा सुविधा के लिए भटकने को मजबूर था और हल्द्वानी के चिकित्सकों ने ग्रसित युवक को एम्स …
मनोज आर्या, रुद्रपुर। रुद्रपुर का पंडित रामसुमेर शुक्ल राजकीय मेडिकल कॉलेज की टीम उस वक्त एक युवक के लिए जीवनदायिनी बनी जब खटीमा का एक युवक हाइडैटिड डिजीज बीमारी से जूझ रहा था। आर्थिक कमजोरी के कारण पीड़ित चिकित्सा सुविधा के लिए भटकने को मजबूर था और हल्द्वानी के चिकित्सकों ने ग्रसित युवक को एम्स रेफर कर दिया था। मगर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने इसको चुनौती के रूप में लिया और ढाई घंटे की मशक्कत के बाद आखिर युवक के पेट से सैकड़ों अंडानुमा गुच्छा निकालकर उसे जीवनदान दिया।
वरिष्ठ सर्जन प्राचार्य डॉ. केदार सिंह शाही ने बताया कि विगत दिनों खटीमा निवासी मनोज सिंह धामी कई माह से घातक बीमारी से जूझ रहा था। जिसे हाइडैटिड डिजीज कहते हैं। यह बीमारी खाना-पान की वजह से एक ऐसी कीडे़ से जुड़ी होती है। जो शरीर के अंदर एक बार प्रवेश कर गया तो इंसान का या तो दिमाग या फिर लीवर पूरी तरह से फेल कर देता है। लीवर से फटकर अंडानुमा गुच्छा शरीर में फैल चुका था। जिसके बाद युवक को बचाना बेहद ही कठिन था। मगर उनके साथ सर्जन डॉ. गगन दीप मिश्रा सहित चंदन सिंह किरौला व राजेंद्र शर्मा ने मंगलवार की दोपहर को सारी जांचे करने के बाद ढाई घंटे की मशक्कत के बाद युवक का सफल ऑपरेशन कर युवक के पेट से गुच्छेदार अंडानुमा थैलियां निकालने में सफलता प्राप्त की है। उन्होंने बताया कि यह बीमारी का ऑपरेशन भी जिले में पहला है।
इस बीमारी के प्रारंभिक लक्षण
हाइडैटिड डिजीज बीमारी से ग्रसित व्यक्ति के पेट में दर्द, मतली व उल्टी आमतौर पर तब देखी जाती है। जब लिवर में हाइडैटिड होते हैं तो फेफड़ा प्रभावित होता है। इसके बाद नैदानिक लक्षणों में पुरानी खांसी, सीने में दर्द और सांस की तकलीफ शामिल हैं।
