नैनीताल: हाईकोर्ट से सरकार को तीसरा झटका
नैनीताल, अमृत विचार। राज्य सरकार को हाईकोर्ट से यह तीसरा झटका लगा है। इससे पूर्व महिलाओ को 30 प्रतिशत आरक्षण देने, प्राइवेट लोगों को रिजर्व फॉरेस्ट में खनन के पट्टे दिए जाने के बाद अब सचिवालय से बर्खास्त कर्मचारियों के आदेश पर भी रोक लगा दी गई है। विस सचिवालय के कर्मियों की याचिकाओ में …
नैनीताल, अमृत विचार। राज्य सरकार को हाईकोर्ट से यह तीसरा झटका लगा है। इससे पूर्व महिलाओ को 30 प्रतिशत आरक्षण देने, प्राइवेट लोगों को रिजर्व फॉरेस्ट में खनन के पट्टे दिए जाने के बाद अब सचिवालय से बर्खास्त कर्मचारियों के आदेश पर भी रोक लगा दी गई है।
विस सचिवालय के कर्मियों की याचिकाओ में यह भी कहा गया कि उन्हें राजनीतिक कारणों से हटाया गया। सरकार खुद गलती करती है और भुगतना उनको पड़ रहा है। वर्ष 2018 में कोर्ट ने उनकी नियुक्ति को वैध माना था और तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर उनके शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की जांच करने के आदेश दिए थे। इस आदेश के खिलाफ जनहित याचिकाकर्ता सर्वोच्च न्यायालय भी गया।
वहां भी उसकी एसएलपी खारिज हो गयी थी। याचिका के अनुसार, वर्ष 2016 से 2021 के बीच नियुक्त कर्मचारी ही बैकडोर से नहीं आये हैं। उससे पहले भी ऐसी नियुक्तियां हुई हैं और वे नियमित हो चुके हैं।
यह मामला राजनीतिक दुर्भावनाओं से प्रेरित है जिसकी सजा उन्हें मिल रही है। याचिकर्ताओं के अनुसार, उन्होंने विधानसभा सचिवालय में नौकरी के लिए प्रार्थनापत्र दिया था और उन्हें स्वीकृत पदों के आधार पर नियुक्ति दी गयी। कोर्ट ने भी माना है कि यह आदेश नियम विरुद्ध है। इतने कर्मचारियों को एक साथ, एक से आदेश से, जनहित के लिए बिना किसी कारण के बिना उनको सुने, हटाया नहीं जा सकता है।
