अयोध्या: ‘क्षत्रिय ही करा सकता है शिलान्यास, प्राण प्रतिष्ठा व अनुष्ठान’

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अयोध्या। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए चल रही कवायद के बीच एक और मांग खड़ी हो गई है। कहा गया है कि सनातन परंपरा व पद्धति के मुताबिक निर्माण के लिए भूमिपूजन, शिलान्यास, विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा व यज्ञ-अनुष्ठान केवल क्षत्रिय ही करा सकता है। ऐसे …

अयोध्या। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए चल रही कवायद के बीच एक और मांग खड़ी हो गई है। कहा गया है कि सनातन परंपरा व पद्धति के मुताबिक निर्माण के लिए भूमिपूजन, शिलान्यास, विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा व यज्ञ-अनुष्ठान केवल क्षत्रिय ही करा सकता है। ऐसे में मन्दिर निर्माण के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट में समाज को व्यापक भागेदारी दी जाय।

मंगलवार को प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में समाजसेवी राजेश सिंह मानव ने अपनी मांग को लेकर तर्क भी पेश किया। कहा कि पद्धति ग्रन्थ पाणिनीय सूत्र में वर्णित है कि यज्ञ विधि विधान में क्षत्रिय ही अधिकारी है,कोई अन्य नहीं। वही शतपथ ब्राह्मण ग्रंथ में कहा गया है कि यज्ञ करने का अधिकार उसी कुलीन क्षत्रिय को है जो मूर्धाभिषिक्त राजा हो, ब्राह्मण या वैश्य को इसका अधिकार नहीं है। अपनी मांग के समर्थन में उन्होंने विक्रमादित्य काल का ऐतिहासिक उदाहरण भी प्रस्तुत किया।

लाला सीताराम की ओर से लिखित पुस्तक ‘अयोध्या का इतिहास’ के हवाले से बताया कि अयोध्या की पहचान कर जब राजा विक्रमादित्य ने मंदिरों का पुनः निर्माण शुरू कराया तो पंडितों ने उनको सलाह दी कि यज्ञ में श्री राम के वंशजों को शामिल किया जाए। सनातन वैदिक परंपरा को बरकरार रखने के लिए बनारस के पंडितों की सलाह पर धौराहर सिंह महाराज को अयोध्या के सिंहासन पर बिठाकर वैदिक विधि विधान के बीच अयोध्या में मंदिरों के निर्माण कार्य का शुभारंभ कराया। धौराहर टीला आज भी इसके स्मृति चिन्ह के रूप में विद्यमान है।

मानव ने मांग उठाई कि जन्म भूमि पर राम मंदिर राजा विक्रमादित्य की परिकल्पना तथा सनातन परंपरा के अनुरूप बनाया जाए।जिसमें 64 कसौटी शिलालेख के खंभे लगे हो। शास्त्रों में वर्णित है कि विक्रमादित्य के राम मंदिर का शिखर आज के 42 किलोमीटर दूर से दिखाई पड़ता था। वर्तमान मंदिर भी इसी तरह गगनचुंबी और भव्य-दिव्य होना चाहिए। देश में और कोई दूसरा इतना भव्य और दिव्य मंदिर न बन सके, इसके लिए संसद को कानून बनाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वैदिक सनातन परंपरा व पद्धति को बरकरार रखने के लिए ट्रस्ट में कुलीन क्षत्रियों को स्थाई सदस्य नामित किया जाए। ऐसा न होने पर चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। जिसके लिए वेद मर्मज्ञ ब्राह्मण के आश्रय में आर्य धर्म,वैदिक परंपरा का शंखनाद कर सनातन समाज को लामबंद करने का कार्य शुरू कर दिया गया है।

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