बरेली: कुतुबखाना पुल का निर्माण अब सेतु निगम-राइट्स में उलझा, अफसरों में दिखी समन्वय की कमी
बरेली, अमृत विचार। पूर्व मंडलायुक्त ने कुतुबखाना पुल का निर्माण कार्य जितनी तेजी से आरंभ करवाया, उतनी ही तेजी से स्मार्ट सिटी के अफसरों ने इसे रुकवा दिया है। चार दिन से मशीनें बंद हैं। अब माना जा रहा है दिवाली बाद ही कार्य शुरु हो पाएगा। अफसरों ने पुल बनाने में सिद्धहस्त सेतु निगम के साथ- …
बरेली, अमृत विचार। पूर्व मंडलायुक्त ने कुतुबखाना पुल का निर्माण कार्य जितनी तेजी से आरंभ करवाया, उतनी ही तेजी से स्मार्ट सिटी के अफसरों ने इसे रुकवा दिया है। चार दिन से मशीनें बंद हैं। अब माना जा रहा है दिवाली बाद ही कार्य शुरु हो पाएगा। अफसरों ने पुल बनाने में सिद्धहस्त सेतु निगम के साथ- साथ राइटस कंपनी का भी पुल निर्माण में प्रवेश करा दिया है। कंपनी ने निर्माण एजेंसी द्वारा छोटा पिलर खड़ा करने के औचित्य पर प्रश्न उठा दिया है। इससे पुल निर्माण का मामला फंस गया है। त्योहार के समय बाजार खोद डाला गया है। अफसरों के बीच समन्वय नहीं होने का असर तय समय पर निर्माण पूरा करने पर पड़ना तय है। इससे पुल छह माह में बनकर तैयार होने पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
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पुल निर्माण कराना अफसरों के लिए टेढ़ी खीर था। पूर्व कमिश्नर सेल्वा कुमारी जे ने पुल बनाने की दृढ़इच्छा शक्ति दिखाते हुए इसका निर्माण शुरू कराकर स्मार्ट सिटी के अफसरों की बड़ी मुसीबत आसान कर दी, लेकिन अब अफसर ही पुल निर्माण को तय समय में पूरा कराने के बजाए उसमें हीलाहवाली बरत रहे हैं। स्मार्ट सिटी ने सेतु निगम को पुल निर्माण का सुपरविजन करने के लिए 12.5 फीसदी चार्ज दिया है। पुल बनाने में सेतु निगम का विदेशों में भी नाम है, लेकिन स्थानीय अफसर उस पर विश्वास नहीं करके राइट्स कंपनी से भी सलाह ले रहे हैं। जबकि राइट्स को पुल बनाने में सेतु निगम से ज्यादा अनुभव नहीं है।
सेतु निगम के पास सभी तरह के विंग हैं। कमिश्नर संयुक्ता समद्दार ने पुल की बार-बार बदली जा रही डिजाइन को आईआईटी से जांच कराने के बाद ही उस पर काम कराने की बात कही है। यह डिजाइन अभी आईआईटी से आया नहीं है। उधर निर्माण एजेंसी के लोगों का कहना है कि राइट्स ने पिलर को 1.2 मीटर का करने का औचित्य पूछ लिया है। जबकि पिलर को डेढ़ मीटर से कम करने पर आवागमन को कुछ जगह मिल जाएगी। एजेंसी का कहना है कि यह तकनीक है। अब राइट्स को तकनीक नहीं पता है तो उसमें कौन क्या कर सकता है। लगातार बैठकों का नतीजा नहीं निकल रहा।
सोमवार को स्मार्ट सिटी के जीएम बीके सिंह, सेतु निगम के डीपीएम वीके सेन सहित राइट्स कंपनी के अफसरों ने कुतुबखाना पुल का निरीक्षण किया था। एक पिलर पर काम चल रहा था शेष सभी मशीनें बंद थीं। अब हालत यह हो गई है कि काम पूरी तरह बंद हो गया है। निर्माण एजेंसी ने दिवाली बाद काम करने की बात मजदूरों से कही है। कुतुबखाना पुल निर्माण की यहीं स्थिति रही तो छह माह में पुल पूरा नहीं हो पाएगा। इसके पहले अभी तक नगर निगम के जलकल विभाग ने 71 लाख रुपये लेकर अभी तक पाइप लाइन शिफ्ट नहीं की है।
निर्माण में शुरुआत से लगे सुपरवाइजरों का कहना था कि उन्हें दिवाली तक कुतुबखाना तिराहे तक पिलर की खोदाई कर देनी थी, लेकिन जिस तरह काम रुक रहा है उससे अब वहां तक नहीं पहुंच पाएंगे। इस बारे में बरेली स्मार्ट सिटी के जीएम बीके सिंह से बात करनी चाही लेकिन उनका फोन नहीं उठा।
कुतुबखाना पुल का काम बरेली स्मार्ट सिटी करवा रहा है। वह जैसा चाहें कर सकते हैं। स्मार्ट सिटी के अन्य कार्य का सुपरविजन राइट्स कर रहा है। सेतु निगम के कार्य भी उसी से दिखवाया जा रहा है। कुछ इश्यू है। डिजाइन को आईआईटी मुंबई भेजा गया है। वहां से आने पर काम शुरू किया जाएगा।- वीके सेन, डीपीएम, सेतु निगम
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