बरेली: धनतेरस पर बाजारों में धनवर्षा, कोरोना काल के बाद खिले व्यापारियों के चेहरे

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बरेली, अमृत विचार। कोरोना महामारी के बाद इस बार शहर में धनतेरस पर शनिवार को शहर में बाजार गुलजार रहे और जमकर धनवर्षा हुई। सुबह से ही दुकानें सजना शुरू हो गए थीं लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया बाजारों में चहल-पहल बढ़ती गई। ग्राहकों ने बाजार की तरफ रुख किया तो दुकानों पर चमक बढ़ गई। …

बरेली, अमृत विचार। कोरोना महामारी के बाद इस बार शहर में धनतेरस पर शनिवार को शहर में बाजार गुलजार रहे और जमकर धनवर्षा हुई। सुबह से ही दुकानें सजना शुरू हो गए थीं लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया बाजारों में चहल-पहल बढ़ती गई। ग्राहकों ने बाजार की तरफ रुख किया तो दुकानों पर चमक बढ़ गई। इस दौरान शुभ मुहूर्त देखकर लोगों ने बर्तन, जेवर, वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों की जमकर खरीदारी की। बाजारों की स्थिति ऐसी थी कि वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लगी हुई थीं। कुतुबखाना, श्यामतगंज में तैनात पुलिस के जवान यातायात को सुचारू रखने के लिए पसीना बहाते नजर आए। देर शाम में बाजारों में खरीददारी का सिलसिला चलता रहा। कोरोना काल के बाद बाजारों में ग्राहकों की भीड़ देखकर दुकानदारों के भी चेहरे खिले हुए थे।

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शहर के मुख्य बाजार में सुबह से ही दुकानदार सामानों पर ऑफर के साथ ग्राहकों का इंतजार करते रहे। दोपहर तक बाजार में कम संख्या में ग्राहक बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक, फर्नीचर, कपड़ा और ज्वेलरी की दुकानों पर खरीदारी करते दिखे। हालांकि चार पहिया और दो पहिया वाहनों की खरीदारी करने वाले लोग मुहूर्त का बिना इंतजार किए दिन में ही नए वाहन अपने-अपने घरों पर लाए। सर्राफा बाजार में लोगों ने आधुनिक डिजाइन के आकर्षक ऑफर के साथ सोने-चांदी के आभूषण खरीदे। इसके अलावा बर्तनों, इलेक्ट्रॉनिक आइटम, लैपटॉप, कंप्यूटर, मोबाइल और फर्नीचरों की भी लोगों ने जमकर खरीदारी की।

खूब बिके लक्ष्मी-गणेश और विक्टोरिया वाले सिक्के
धनतेरस पर्व पर चांदी के लक्ष्मी-गणेश के सिक्के और मूर्ति लेने की परंपरा है। दीपावली में इन्हीं सिक्कों और मूर्ति से माता लक्ष्मी और गणपति की पूजा करने का विधान है। बाजार में कई तरह के चांदी के सिक्के उपलब्ध हैं। इनमें लक्ष्मी-गणेश व विक्टोरिया की छाप वाले सिक्कों की मांग अधिक रहीं। कुछ लोग पुराने सिक्कों की खरीदारी करते भी दिखे। दस से सौ ग्राम तक के वजन के सिक्कों की कीमत 800 से लेकर दस हजार रुपए तक रही। लोगों ने अपने जेब के अनुसार सिक्कों की खरीदारी की।

मांग के अनुरूप उपलब्ध नहीं हुई गाड़ियां
ऑटोमोबाइल सेक्टर कंपनियां इस बार मांग के अनुरूप आपूर्ति की नहीं कर पाईं। मांग के मुताबिक गाड़ियां उपलब्ध नहीं हो सकी, जिससे ज्यादा अच्छा कारोबार नहीं हो सका। कई गाड़ियों की मांग इतनी अधिक थी कि उसे पूरा नहीं किया जा सका। कुछ यही स्थिति लग्जरी गाड़ियों के शोरूम की स्थिति भी रही। बुलेट बाइक निकालने वालों के अनमानों पर पानी फिर गया। आज बुकिंग करने वाले तीन महीने वाद उनको बुलेट बाइक मिल सकेगी।

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