अल्मोड़ा का आदमखोर तेंदुआ आखिरकार हुआ ढेर
नैनीताल। उत्तराखंड के अल्मोड़ा में आतंक का पर्याय बना आदमखोर तेंदुए को आखिरकार शिकारियों ने ढेर कर दिया। वन विभाग के शिकारियों के दल को गुरुवार रात को यह कामयाबी हासिल हुई। अल्मोड़ा के प्रभागीय वनाधिकारी महातिम यादव ने बताया कि तेंदुए की उम्र लगभग आठ से नौ साल थी और वह जंगली जानवरों का …
नैनीताल। उत्तराखंड के अल्मोड़ा में आतंक का पर्याय बना आदमखोर तेंदुए को आखिरकार शिकारियों ने ढेर कर दिया। वन विभाग के शिकारियों के दल को गुरुवार रात को यह कामयाबी हासिल हुई। अल्मोड़ा के प्रभागीय वनाधिकारी महातिम यादव ने बताया कि तेंदुए की उम्र लगभग आठ से नौ साल थी और वह जंगली जानवरों का शिकार करने में अक्षम हो गया था।
मौके पर तैनात वन विभाग के सूत्रों ने बताया कि तेंदुए का एक दांत नहीं था और पांवों के नाखून भी घिसे गये थे। इसलिये वह शिकार करने में सक्षम नहीं था और उसने इंसानों को अपना शिकार बनाना शुरू कर दिया था। यादव ने बताया कि वन विभाग की टीम ने कई दिनों तक तेंदुए के व्यवहार पर नजर रखी। उसे पहले पकड़ने का प्रयास किया गया।
आखिरकार जब तेंदुआ कई दिनों तक पकड़ में नहीं आया तो उसे कल रात शिकारियों ने मार दिया। उन्होंने कहा कि तेंदुए के व्यवहार और पंजे के निशान से साफ है कि मारा गया तेंदुआ आदमखोर है। तेंदुआ का पोस्टमार्टम करा लिया गया है। उसके बाद उसके शरीर को मौके पर ही नष्ट कर दिया गया है। तेंदुए की पूरी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है।
उल्लेखनीय है कि अल्मोड़ा के भैसिंयाछाना विकास खंड के उडल गांव में विगत छह जुलाई को तेंदुए ने डेढ़ साल के मासूम हर्ष को उस समय अपना निवाला बना लिया था जब वह अपने मां के साथ घर के आंगन में खेल रहा था। उसी के दो दिन बाद खेत में काम कर रही 70 साल की एक बुजुर्ग महिला का भी शव बरामद हुआ था जिसमें बाद में जांच में पता चला कि तेंदुए के हमले में ही महिला की जान गयी है।
लगातार दो घटनाओं के बाद क्षेत्र के लोगों में गम और गुस्सा दोनों था। इसके बाद शासन ने तेंदुए को आदमखोर घोषित कर दिया था और उसे जिंदा या मुर्दा पकड़ने के निर्देश दे दिये थे। तेंदुए को पकड़ने के लिये वन विभाग की ओर से हल्द्वानी और बिजनौर से हरीश धामी व सैफी आसिफ नामक शिकारियों के दो दलों को मौके पर लगाया गया था।
