मित्रता करो तो भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा जैसी: कथा व्यास

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तारून, अयोध्या। मित्रता करो तो भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी। सच्चा मित्र वही है, जो अपने मित्र के दुःख को बिना कहे समझ जाए। दुःख, कष्ट के समय हमेशा सहयोग के लिए खड़ा रहे। यह बातें क्षेत्र के लालगंज में चंद्रशेखर पांडेय के आवास पर श्रीमदभागवत कथा में कथा व्यास धर्म जी महाराज ने कही। …

तारून, अयोध्या। मित्रता करो तो भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी। सच्चा मित्र वही है, जो अपने मित्र के दुःख को बिना कहे समझ जाए। दुःख, कष्ट के समय हमेशा सहयोग के लिए खड़ा रहे। यह बातें क्षेत्र के लालगंज में चंद्रशेखर पांडेय के आवास पर श्रीमदभागवत कथा में कथा व्यास धर्म जी महाराज ने कही।

उन्होंने सूर्यवंशी राजाओं की कथा, कंस वध, उद्धव प्रसंग, जरासंध वध, द्वारिका पूरी की महिमा के बाद सुदामा चरित्र का वर्णन किया। कथा व्यास ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का उदाहरण दिया। कथा व्यास ने कहा आजकल स्वार्थ की मित्रता रह गई है। जब तक स्वार्थ सिद्ध नहीं होता है, तब तक मित्रता रहती है।

उन्होंने कहा भागवत सुदामा संसार में सबसे अनोखे भक्त रहे हैं। वह जीवन में जितने गरीब नजर आए, उतने वे मन से धनवान थे। उन्होंने अपने सुख व दुखों को भगवान की इच्छा पर सौंप दिया था। श्रीकृष्ण और सुदामा के मिलन का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। उन्होंने कहा कि जब सुदामा भगवान श्रीकृष्ण ने मिलने आए तो उन्होंने सुदामा के फटे कपड़े नहीं देखे, बल्कि मित्र की भावनाओं को देखा।

जीवन में मनुष्य को श्रीकृष्ण की तरह अपनी मित्रता निभानी चाहिए। उन्होंने बताया कंस का अर्थ भीतर की बुराईयों को मारना है। कथा में के डी चौबे, उपेंद्र तिवारी, अखिल यादव, सुजीत कुमार शर्मा, देवनारायण सोनी, साधना मिश्रा, बीना पांडेय, प्रीतम पाण्डेय आदि मौजूद रहे।

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