नैनीताल: डीएम साहब… जिगर और सिंघम के लिए भी कुछ सोचिए…

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नैनीताल, अमृत विचार। ब्रिटिश शासनकाल में अंग्रेज अफसर घुड़सवारी के काफी शौकीन थे या यूं कहें कि उन दिनों अवागमन का एक बेहतरीन साधन घोड़े ही होते थे। जितने शानदार नस्ल के घोड़े होते थे उतने ही शानदार उनके रहने के लिए अस्तबल होते थे जिनमें व्यापक इंतजाम हुआ करते थे। नैनीताल में भी कुछ …

नैनीताल, अमृत विचार। ब्रिटिश शासनकाल में अंग्रेज अफसर घुड़सवारी के काफी शौकीन थे या यूं कहें कि उन दिनों अवागमन का एक बेहतरीन साधन घोड़े ही होते थे। जितने शानदार नस्ल के घोड़े होते थे उतने ही शानदार उनके रहने के लिए अस्तबल होते थे जिनमें व्यापक इंतजाम हुआ करते थे। नैनीताल में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिलता था। समय बीतता गया पर पर्यटकों में घुड़सवारी का क्रेज कम नहीं हुआ, हलांकि घोड़ा स्टैंड जरूर शिफ्ट कर दिया गया। पर एक टीस जरूर है कि आधुनिकता के रंग में रंगा नैनीताल अपने पुराने स्वरुप को भूल गया। इसे करीब से समझने वाले लोगों को यह सब कचोटता ही रहा है।

खैर सरोवर नगरी नैनीताल में हर वर्ष लाखों सैलानी पहुचंते हैं। वह यहां के प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेते हैं। साथ ही नैनी झील में नौकायन और घुड़सवारी कर अपनी यात्रा को यादगार बनाते हैं। घोड़ा चालक समिति के अध्यक्ष उमर बताते हैं कि पर्यटक घुड़सवारी के लिए बारापत्थर घोड़ा स्टैंड पहुंचते हैं।  जगलों के बीच घुड़सवारी का आनंद लेते हैं। उमर ने बताया कि सैलानियों को जिगर (काला) और सिंघम (सफेद) की जोड़ी खूब भाती है। सभी लोग जिगर और सिंघम की घुड़सवारी करना पसंद करते हैं।

जिगर और सिंघम को वह 4 साल पहले राजस्थान में लगने वाले पुष्कर मेले से नैनीताल लाए थे। घोड़े दोनों ही सुंदर हैं एक काला है तो दूसरा सफेद रंग का। इन घोड़ों को पर्यटक देखते ही इसी में घुड़सवारी का आनंद लेने के लिए डिमांड करते हैं। वह बताते हैं कि घोड़ों की सरसों के तेल से मालिश की जाती है। ठंड में इन दिनों जिगर और सिंघम सहित अन्य घोड़ों को गुड़, अजवाइन और सरसों का तेल पिलाकर इनको ठंड से बचाया जाता है। पर यहां शौचालय की व्यवस्था न होने से सैलानियों सहित घोड़ा चालकों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वहीं घोड़ों के रहने के लिए एक अदद अस्तबल की व्यवस्था भी नहीं है। वह कई बार बार नगरपालिका व जिला प्रशासन को पत्र लिख चुके हैं लेकिन मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया। बहरहाल डीएम धीराज गर्ब्याल से उन्हें इस बात की उम्मीद जरूर है कि नैनीताल को करीब से समझने में  उनका कोई सानी नहीं है और वे कुछ न कुछ ऐसे प्रबंध जरुर करेंगे जिससे नैनीताल में घोड़ों की पदचापों को फिर वही पहचान मिल सके जो यहां की रौनक हुआ करती थी।

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