नैनीताल: राज्य सरकार और उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी बीएस सिद्धू को नोटिस जारी
नैनीताल, अमृत विचार। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने तत्कालीन डीएफओ मसूरी सहित तीन अन्य वनाधिकरियो के खिलाफ निचली अदालत से जारी सम्मनिंग आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर मंगलवार को सुनवाई की।
मामले को सुनने के बाद न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी की एकलपीठ ने निचली अदालत से जारी सम्मनिंग आदेश पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार और उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी बीएस सिद्धू को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 3 जनवरी को होगी।
मामले के अनुसार, मसूरी के पूर्व डीएफओ धीरज पांडेय, वीरेंद्र दत्त जोशी, प्रसाद सकलानी व जगमोहन रावत ने निचली अदालत द्वारा 21 अक्टूबर 2022 को जारी सम्मनिंग आदेश को चुनौती देते कहा कि आगे की कार्यवाही पर रोक लगाई जाए। याचिकाओं में कहा गया है कि पूर्व डीजीपी द्वारा बदले व दबाव डालने के बहाने चारों अधिकारियों के खिलाफ 9 जुलाई 2013 को मुकदमा दर्ज किया। निचली अदालत में यह मामला अब सुनवाई पर आया, जिसमें निचली अदालत ने 21 अक्टूबर को उनको समन भेजा।
जबकि पूर्व डीजीपी द्वारा अपने पद का दुरुप्रयोग करते हुए रिजर्व फॉरेस्ट की 7450 वर्ग मीटर भूमि 20 नवंबर 2012 को खरीदकर आरक्षित पेड़ों का कटान भी किया। इस पर डीएफओ द्वारा उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। इसी बदले की भावना को लेकर पूर्व डीजीपी द्वारा उनके ऊपर झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया।
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता डॉ. कार्तिकेय हरि गुप्ता ने कोर्ट को अवगत कराया कि यह मुकदमा बदले की भावना को लेकर दायर किया गया है। पूर्व डीजीपी पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पेड़ काटने के मामले में जुर्माना भी लगाया है। इस मुकदमे में इन अधिकारियो को झूठा फंसाया गया।
