शाहजहांपुर: आठ माह से सऊदी में फंसा शव, वतन वापसी में पेंच, बेटे का चेहरा देखने को तड़प रही मां

मोहल्ला मेहमानशाह निवासी 35 वर्षीय मोहम्मद आलम की आठ महीने पहले जेद्दा में मौत हो गई थी।

शाहजहांपुर: आठ माह से सऊदी में फंसा शव, वतन वापसी में पेंच, बेटे का चेहरा देखने को तड़प रही मां

घर परिवार की खुशहाली के लिए मजदूरी करने सऊदी गए मोहम्मद आलम की मौत खबर कई महीने बाद आई तो मां बेटे का अंतिम बार

शाहजहांपुर, अमृत विचार। घर परिवार की खुशहाली के लिए मजदूरी करने सऊदी गए मोहम्मद आलम की मौत खबर कई महीने बाद आई तो मां बेटे का अंतिम बार चेहरा देखने के लिए तड़प उठी। डीएम-एसपी से लेकर दूतावास तक फरियाद की, लेकिन शव की वतन वापसी का मामला पेचीदगियों में फंस गया है।

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शहर की कोतवाली चौक क्षेत्र के मोहल्ला मेहमानशाह निवासी 35 वर्षीय मोहम्मद आलम की आठ महीने पहले जेद्दा में मौत हो गई थी। आलम की 85 साल की मां मरियम और भाई आफताब, जहां उसके शव को भारत लाकर उसे सुपुर्द-ए-खाक करना चाहते हैं।

वहीं, आलम की पत्नी ने जेद्दा में ही अपने एक परिचित को कथित तौर पर उसके अंतिम संस्कार के लिए अधिकृत कर दिया है। बहरहाल, इस खींचतान के बीच आलम का शव अभी जेद्दा में ही है। एसपी एस. आनंद ने रविवार को बताया कि नौकरी के लिए वर्ष 2013 में जेद्दा गए मोहम्मद आलम की 30 मार्च 2022 को मौत हो गई थी। लगभग आठ महीने से मृतक का शव जेद्दा में ही है।

आनंद के मुताबिक, मृतक की मां और भाई शव को भारत लाकर सुपुर्द-ए-खाक करना चाहते हैं, जबकि उसकी बीवी ने कथित तौर पर जेद्दा में ही अपने किसी परिचित को आलम के अंतिम संस्कार के लिए अधिकृत कर दिया है। दोनों ही पक्षों की एक राय नहीं हो पाने की वजह से यह मामला अटका हुआ है। आलम के भाई आफताब ने कहा, “मेरा भाई नौकरी के लिए नौ साल पहले जेद्दा गया था। वह समय-समय पर घर आता था, लेकिन इस साल उसे कोविड-19 संक्रमण हो गया, जिसके बाद 30 मार्च को उसकी मौत हो गई। हालांकि, परिवार को इसकी सूचना करीब पांच महीने बाद 24 अगस्त को मिली।

आफताब ने बताया कि भारतीय दूतावास ने परिजनों से पूछा था कि वे आलम के शव को भारत लाना चाहते हैं या जेद्दा में ही उसका अंतिम संस्कार करने को राजी हैं। आफताब ने बताया कि इस पर परिजनों ने पांच दिन में कागजी कार्यवाही पूरी कर शव को भारत लाने की गुहार लगाई, लेकिन आलम की पत्नी फरहीन बेगम द्वारा सऊदी अरब स्थित भारतीय दूतावास को पत्र लिखकर शव का अंतिम संस्कार वहीं करा देने की बात कहने से उसके भाई का शव भारत नहीं लाया जा सका है।

उधर, आलम की पत्नी फरहीन का कहना है कि वह खुद भी चाहती है कि उसके पति का अंतिम संस्कार शाहजहांपुर में हो, लेकिन अगर शव भारत लाने की स्थिति में नहीं है तो उसे जेद्दा में ही सुपुर्द-ए-खाक कर दिया जाए। फरहीन के मुताबिक, आलम की मौत मार्च में हुई थी, जिसकी सूचना उन्हें पांच महीने बाद दी गई और अब तीन महीने और गुजर चुके हैं।

उसने कहा कि अगर आलम के शव को भारत लाया जाएगा तो उसकी हालत और भी खराब हो जाएगी, इसलिए बेहतर है कि उसका जेद्दा में ही अंतिम संस्कार कर दिया जाए। फरहीन ने अंतिम संस्कार के लिए जेद्दा में रहने वाले जहूर आलम नामक व्यक्ति को अधिकृत कर दिया है।

फरहीन का यह भी कहना है कि उसे बताया गया है कि शव को भारत लाने में आठ लाख रुपये खर्च होंगे, जो उसके पास नहीं हैं। हालांकि, आफताब का दावा है कि शव को भारत लाने में धन खर्च होने की बात गलत है।

उसने कहा, बेटे को खोने के गम में रोते-रोते मेरी मां की एक आंख की रोशनी चली गई है। वह बाहर आने-जाने वाले हर शख्स से बस इतना ही कहती है कि उसे एक बार अपने बेटे का चेहरा दिखा दिया जाए।

आफताब ने कहा कि भाई का शव भारत लाने के लिए वह मंत्री से लेकर सांसद तक, सबसे फरियाद और गुहार कर चुका है, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उसने कहा कि अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ही मदद की आस है, ताकि आफताब का शव उसके वतन में ही सुपुर्द-ए-खाक किया जा सके।

मामला उनके संज्ञान में आने पर उन्होंने सऊदी अरब स्थित भारतीय दूतावास से जरूरी सूचना मंगवाई। उन्होंने बताया कि पुलिस मृतक के परिवार के संपर्क में है और उनकी इच्छा के तहत पूरी मदद कर रही है-एस. आनंद, एसपी।

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